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Wednesday, December 24, 2025

मनरेगा से VB–G RAM G तक: ग्रामीण रोजगार, जल संरक्षण और पर्यावरण की बदलती नीति

 


ग्रामीण स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने वाली देश की सबसे चर्चित योजना—महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा)—एक बार फिर सुर्खियों में है। केंद्र सरकार करीब दो दशक पुरानी इस योजना को समाप्त कर उसकी जगह एक नई योजना लाने की तैयारी में है। प्रस्तावित योजना का नाम है विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’, जिसे संक्षेप में VB–G RAM G कहा जा रहा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को ‘VB–G RAM G बिल, 2025’ लोकसभा में पेश कर दिया है।

सरकार के इस कदम को उसी क्रम में देखा जा रहा है, जैसे वर्ष 2015 में योजना आयोग को समाप्त कर उसकी जगह नीति आयोग की स्थापना की गई थी। उस समय नीति आयोग को ‘नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’ के रूप में विकास की नई सोच का प्रतीक बताया गया था। अब उसी तरह मनरेगा की जगह VB–G RAM G को ग्रामीण रोजगार और आजीविका के नए मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। इस बदलाव ने एक बार फिर मनरेगा की भूमिका—विशेषकर जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और ग्रामीण संसाधन प्रबंधन—को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

 

रोजगार से आगे: मनरेगा की पर्यावरणीय भूमिका

मनरेगा को प्रायः केवल एक “रोजगार गारंटी योजना” के रूप में देखा गया, जबकि इसकी अवधारणा इससे कहीं व्यापक रही है। रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ यह योजना ग्रामीण भारत में जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज, मिट्टी संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने का एक मजबूत माध्यम बनी। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की अनुसूची-1 में शामिल 266 कार्यों में से बड़ी संख्या प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (NRM) और कृषि आधारित गतिविधियों से जुड़ी रही।

इन कार्यों में तालाब, कुएं, पोखर, पर्कुलेशन पिट, चेकडैम, एनिकट, कंटूर ट्रेंच, मेड़बंदी, नालों की सफाई, वृक्षारोपण और चारागाह विकास जैसे कार्य प्रमुख रहे। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (IIPA) सहित कई संस्थानों की रिपोर्टों के अनुसार, मनरेगा के 60 प्रतिशत से अधिक कार्य सीधे तौर पर जल, मिट्टी और भूमि सुधार से संबंधित रहे हैं।

 

भूजल रिचार्ज और जल सुरक्षा

ग्रामीण भारत की खेती आज भी बड़े पैमाने पर भूजल पर निर्भर है। मनरेगा के तहत बनाए गए छोटे लेकिन टिकाऊ जल-संरचनाओं ने कई क्षेत्रों में भूजल स्तर सुधारने में अहम भूमिका निभाई। खेत-तालाब, चेकडैम और पर्कुलेशन टैंक जैसे ढांचों ने वर्षा जल को गांवों में ही रोकने का काम किया। नतीजतन, कई इलाकों में सूखे पड़े तालाब और कुएं दोबारा जीवित हुए और सिंचाई व पेयजल की उपलब्धता बेहतर हुई।

 

खेती, पशुपालन और आजीविका को मजबूती

जल संरक्षण के साथ-साथ मनरेगा के कार्यों ने मिट्टी कटाव रोकने और भूमि की उर्वरता बनाए रखने में भी योगदान दिया। कंटूर ट्रेंच और मेड़बंदी जैसे उपायों से खेतों की नमी बनी रही, जिससे रासायनिक खाद पर निर्भरता कम हुई और टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिला।

2016–17 में योजना में चरागाह विकास को शामिल किए जाने से पशुपालन आधारित आजीविका को नया सहारा मिला। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में मनरेगा के तहत बंजर और सामुदायिक भूमि पर चारागाह विकास ने दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण आय में वृद्धि की।

 

सूखा–बाढ़ प्रबंधन में कारगर

मनरेगा के तहत स्वीकृत कार्यों का एक बड़ा हिस्सा सूखा और बाढ़ प्रबंधन से जुड़ा रहा है। जलग्रहण विकास, तालाब पुनर्जीवन, नालों की सफाई, तटबंध निर्माण और जल निकासी सुधार जैसे कार्यों ने जलवायु से जुड़ी आपदाओं के प्रभाव को कम करने में मदद की। यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि आपदा-सहिष्णु ग्रामीण विकास मॉडल मानते हैं।

 

हरियाली, जैव विविधता और जलवायु संतुलन

वृक्षारोपण, सामाजिक वानिकी और हरित पट्टियों के विकास से गांवों में ग्रीन कवर बढ़ा। इससे स्थानीय तापमान संतुलन, कार्बन अवशोषण और जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा मिला। अध्ययनों के अनुसार, एक परिपक्व पेड़ सालाना 20–25 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करता है, जिससे मनरेगा के पर्यावरणीय कार्य जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी सहायक साबित हुए।

 

महिला सशक्तिकरण की मजबूत आधारशिला

मनरेगा में महिला भागीदारी कई राज्यों में 50 प्रतिशत से अधिक रही। समान मजदूरी, स्थानीय स्तर पर रोजगार और जल संरक्षण से जुड़े कार्यों ने महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक स्थिति को मजबूत किया। जलस्रोतों के पास होने से पानी लाने की उनकी दैनिक कठिनाइयाँ भी कम हुईं, जिससे उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और आय-वर्धक गतिविधियों के लिए अधिक समय मिला।

 

VB–G RAM G से उम्मीदें

नई VB–G RAM G योजना को मनरेगा के “नए अवतार” के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें परिसंपत्ति निर्माण, डिजिटल मॉनीटरिंग और पारदर्शिता पर विशेष जोर देने की बात कही गई है। जहां मनरेगा का मूल उद्देश्य गरीबी उन्मूलन के लिए रोजगार उपलब्ध कराना था, वहीं VB–G RAM G में जल और अन्य परिसंपत्तियों को इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में प्राथमिकता देने का संकेत मिलता है।

हालांकि, इस नई योजना का विस्तृत स्वरूप अभी सामने आना बाकी है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या VB–G RAM G मनरेगा की उस बहुआयामी भूमिका—रोजगार, जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण—को उसी मजबूती से आगे बढ़ा पाती है या नहीं। ग्रामीण भारत की जरूरतें केवल रोजगार तक सीमित नहीं हैं; वे जल, भूमि, पर्यावरण और आजीविका के संतुलित विकास से जुड़ी हैं। ऐसे में मनरेगा की विरासत से VB–G RAM G क्या सीख लेती है, यही आने वाले वर्षों में निर्णायक होगा।