Friday, February 27, 2009

Fucking Frustration

कहानी से पहले कुछ शब्द

मेरे बेहद करीबी दोस्त है
कई सालों से उनका अफेयर चल रहा है
जो अब टूटने की कगार पर है
उनकी जिंदगी में कई ऐसे मोड है
जो किसी मुम्बइया फिल्म के लिए धांसू मासाला साबित हो सकता है
खैर उनके लंबे जीवन के कुछ पलों से प्रेरित होकर और उसमें कुछ कल्पनाओं का घालमेल कर
मैंने यह कहानी लिखी है;
लिखना इसलिए जरूरी था कि
क्योंकि यही इस कहानी की नियती थी
बहरहाल
पेश है एक अजब कहानी

पहला प्रसंग


वह बंदा दिल्ली आया था । शायद 2000 की बात हो । कुछ सपनों के साथ और कुछ दोस्तों के कहने पर कहीं घर में महसूस होने वाली उब और बंदिशों से बचने के के लिए आया था। दिल्ली उम्र बीस बाईस के पास रही होगी। उसकी एक प्रेमिका थी।
जैसा उसने बताया। यहां दिल्ली में जीवन में सकून था। जल्द ही काॅलेज शुरू हो गया।काॅलेज में एक लडकी से मोहब्बत जैसी कुछ चीज हुई एक बार फिर दोस्तों के कहने पर प्रपोजल ठोका लडकी ने इंकार कर दिया । वह पैसे वाली लडकी थी। यह ग्रेट इंडियन मिडिल क्लास का बंदा था । वह सेंटी हो गया दोस्तों के साथ दारू पीकर भूलने की कोशिश करता था।समय गुजरता रहा जाॅब की जददोजहद पैसे घर से आने कम होने लगे थे। पिता जी कहना था कुछ टयूश्न वगैरह देखो घर की दिक्कतों को देखते हुए उसने नौकरी खोजना शुरू किया पढने में ठीक था एक नौकरी मिली शुरूआती दिनों में वह सारा ध्यान नौकरी पर देने लगा कुछ माह बीत गए उसे वहां एक लडकी दिखी
भोली सी
अपनी सी
उससे बात शुरू
हुई
कई बार दोनों ने
एक दूसरे की मदद की
अनजाने में
एक प्यारे से रिश्ते की
शुरूआत हो चुकी थी
दिन बीते
माह बीते
साल बीते
बंदे ने नौकरी छोड दी
दूसरी जगह नौकरी करने लगा
वह बहुत व्यस्त हो गया था
उसे काम के अलावा
किसी बात की फिक्र नहीं थी
खूब मेहनत करता था
तरक्की मिली
एक दिन जब वह कार्यालय
जा रहा था
तब
बस स्टाॅप पर
उसे वही पुराने आॅफिस वाली
लडकी दिखी
बाइक रोककर
वह उसके पास गया
दोनों में फोन नंबर
एक दूसरे को दिया
एक बार फिर
जिंदगी सुनहरी करवट लेने लगी
धीरे धीरे
बातचीत रंग लाने लगी
अब दोनों को
जब भी काम से फुसर्त मिलती
आपस में बतियाने में जुटे रहते
दिन बीते
माह बीते
कई बार मुलाकात हुई
कई रेस्टोरेट में
संगीतमय शामें
साथ गुजारी
मिलने की ललक बढी
और फिर
दोनों काम को
किनारे कर मिलने लगे
रिश्ते के भंवर कुछ गहरे हो चले थे
सब कुछ सुनहरा सुनहरा था
सपने जैसा सुनहरा
लडके के लिए
एक अच्छी नौकरी
एक अच्छी लडकी
लडकी के लिए
एक अच्छा साथी
एक नौकरी
दोनों
अपने
दोस्तों के बीच
एक दूसरे को प्रेमी प्रेमिका बताते
कुछ दिनों बाद
लडके ने उसे प्रपोज किया
कुछ नाज नखरे के बाद
लडकी मान गई
मगर
शादी के शत्र्त पर
रिश्तों का भंवर और तेज घूमने लगा था
अब दोनों एक दूसरे की फिक्र करने लगे
लडका खाना खाता है या नहीं
लडकी उसके लिए खाना
घर से बनाकर लाती
लडका
उसकी परवाह करता
उसे घर से
लाता और वापस घर ले जाता
इसी बीच
लडके के लडकी की जाॅब के बारे में पूछा
उसे कई दिक्कतों की बात कही
पहली बार

लडकी अपनी दिक्कतों का रोना रोती रहती थी
लडके की अपनी मुश्किलें थी
दोनों की दिक्कतों ने
एक दूसरे को करीब ला दिया
दोनों और करीब आए
एक दिन
किसी दुपहरी को
वह लडकी इसके घर पहुंची
वहां कोई नहीं था
दोनों के बीच
सेक्स हुआ
लडकी रोने लगी
लडके ने समझाया
लडकी का मन बहल गया
अब
यह दौर
अब हर
सप्ताह जारी रहने लगा
लडकी शादी की बात पर यकीन करती थी
लडका सपने देखता साथ जिंदगी के सपने
दोनों
हर सप्ताह मिलते
सेक्स करते
एक दूसरे के बारे में अच्छी अच्छी बाते करते
एक दूसरे के लिए ढेरो गिफट खरीदते
और काम में लगे रहते
इस बीच
सब अच्छा अच्छा होने लगा
सुनहरा
जिंदगी हसीन थी
प्यार से भरी हुई
सुनहरी
प्यारी
मगर
--
मुझे चेंज चाहिए

हां
उस दिन लडकी
यही तो कह रही थी
लडके से
मैं इस छोटी और घटीया सी
नौकरी से उब चुकी हूं
मुझे कुछ करना है
मुझे नाम , शोहरत और पैसा पाना है
लडके को भी यही चाहिए था
नाम ,शोहरत पैसा
पर लडकी के सपने ज्यादा बडे थे
उसे घर चाहिए था
कार चाहिए थी
नौकर चाहिए थे
अक्सर
इन बातों को सुनकर
लडके का मन उदास हो जाता
आखिरकार एक अच्छी नौकरी
उसने बदल दी
कुछ पैसों की खातीर उसने भी चेंज कर लिया
लडका नई जगह पर था
ज्यादा पैसे मिलते थे उसे
पैसों से वह अपनी
होने वाली बीबी के लिए
बहुत कुछ खरीदना था
वह उसके लिए घर खरीदना चाहता था
कार भी
नौकरी भी रखने की तमन्ना करता था
रोज रात को सपने में
वह इन चीजों का मालिक बन जाता
वह अक्सर
अपनी होने वाली बीबी को
इन सपनों की कहानी बताता
वह पैसे बचाने लगा था

लडका उसमें बीबी की खोज करता
लडकी उसमें पति को देखती थी
दोनों कुछ खोज रहे थे
मगर शायद
दोनों को कुछ मिल नहीं पा रहा था

इसी बीच लडकी के आॅफिस में
कुछ प्राब्लम हुई
लडके को बताया नहीं
खुद ही फेस करने की कोशिश की
कुछ दिनों बाद
लडके को बात पता चली
कि लडकी का बाॅस
उसका बाॅस उसे तंग करता था
हालांकि
लडकी की खुशकिस्मती देखीए
जल्द ही तंग करने वाला बाॅस बदल गया
नया बास आया
नई समस्याओं के साथ
अब
कुछ बेहतर होने की उम्मीद थी
मगर ऐसा नहीं हुआ
लडकी की स्थिति खराब होती चली गई
नए बास का एक विरोधी
पहले से कार्यालय में मौजूद था
वही लडकी की मदद के लिए आगे आया
लडकी ना नही कर सकी
अब आॅफिस में उस
लडकी की स्थिति बेहतर हो चली थी
जिसने उसकी मदद की थी
वह गुट प्रभावी होने लगा था
एक रात वापस घर जाने के लिए लडकी
बस स्टाॅप पर बस का इंतजार कर रही थी
मददगार बंदा
अपनी कार लेकर आया
लडकी ने ना नुकर की
फिर उसे बस में होने वाली दिक्कतों की याद आई
लडके जिस तरह से कुछ महसूस करने के चक्कर में रहते हैं
उसकी रूह कांप गई
वह झट से कार में बैठ गई
इस बीच
उसके प्रेमी का फोन आया
लडकी ने फोन नहीं उठाया
हालांकि
कुछ सोचकर
वह बीच रास्ते में ही उतर गई
रास्ते में मददगार बास ने
घरवालों के बारे में पूछा
कुछ दिन गुजर गए
लडकी का एक सहकर्मी कार्यालय में था
जिससे उसकी अच्छी बनती थी
दोनों एक दूसरे की मदद करते थे
रात को लडकी को घर जाना था
उसने अपने प्रेमी को फोन किया
बातों ही बातों में प्रेमी ने बताया कि
वह बिजी है
बातों ही बातों में
लडकी को कुछ याद आया
उसने अपने दोस्त को फोन किया
वह आया
उस दिन पहली बार
उसका दोस्त उसे बाइक के पीछे
बिठा कर घर छोड आया था
अब रोजाना उसे
कोई न कोई घर छोड देता
कोई नहीं मिलता तो
वह बस का प्रयोग करती
उधर लडका किसी काम से घर गया था
रोज बातचीत होती थी
कई बार कुछ अनबन सी हो जाती
मगर बातों ही बातों में सब सामान्य हो जाता
दोनों एक दूसरे से बंध चुके थे
मोहब्बत का बंधन मजबूत हो चला था
पर
हमेशा की तरह
नियति को
शायद इस बार भी
कुछ और
ही
मंजूर था

कयामत का दिन

हाल ही खरीदी गई
नई सूट पहनकर लडकी आफिस पहुंची थी
उसे लोग अच्छा बता रहे थे
केबिन के पास ही
मददगार बंदा उसे देख रहा था
उसने उसे बुलाया
उसकी तारीफ की
वह अच्छा काम करती है यह भी बताया
लडकी खुश होकर केबिन से निकल गई

दोपहर को लडकी कैंटीन में थी
अपने उसी सहकर्मी के साथ
मददगार बंदा पहुंचा
लडकी को बुलाया
लडके को हडकाया
बातों ही बातों में
किसी काम को जल्द
निपटाने को कहा
काम जारी था
तभी
लडकी को उसने बुलाया
बोला आज पार्टी है
तुम्हे चलना होगा

यहां बता दूं कि मददगार बंदा बीच बीच में
उसके काम पर निगाह रखता था;
अक्सर उसके घर तक छोड जाता था ;
उसकी बीबी थी ;
उससे बात भी कराई थी;
बच्चे भी थे
उनसे भी इस लडकी की बातचीत होती थी;
जी खोलकर
लडकी की मदद करता

लडकी
पार्टी में जाना नहीं चाह रही थी
मगर, वह मना नहीं कर पाई
कार पार्टी स्थल की ओर बढ चली
रास्ते में
बंदे को कुछ याद आया
बोला
अरे एक मिनट के लिए
घर चलना होगा
लडकी को कुछ शक हुआ
मददगार ने भांप लिया
कहा आप कार में बैठे रहना
मैं तुरंत लौअ आउंगा
मददगार का घर
एक महंगी लोकेलिटी पर था
लडकी सोच रही थी
मैं भी अपने
प्रेमी से कहूंगी
कुछ ऐसा ही मकान बनाने को
मैं भी तो अच्छी जिंदगी चाहती हूं
कार में सोचते सोचते
पांच मिनट गुजर चुके थे
मददगार वापस नहीं लौट रहा था
इस बीच
इसके प्रेमी का फोन आया
इसके कहा
आॅफिस में हूं
बाद मंे बात करता हूं
प्रेमी की बातों का उत्साह ठंडा पड गया था
दरअसल
वह घरवालों को रजामंद कर चुका था
उसके लिए कीमती तोहफे लाया था
मगर
वह बोल नहीं पाया
इधर कार में पांच और मिनट गुजर चुके थे
वह कार से उतरी
कुछ सोचती हुई
घर के अंदर दाखिल हुई
अंदर से अचानक आवाज आई
बस हो गया
आ रहा हूं
एक मिनट बाद
दोबारा आवाज आई
अंदर आ जाओ
घबराओ नहीं
पानी पी लो
लडकी ्िरफज से पानी
निकालकर पी रही थी
सामने से उसका मददगार बास
सज संवर कर आ चुका था
सामने दिखते ही उसने कहा
अब तुम इतनी अच्छी लग रही हो तो
मुझे भी अच्छा डेस पहनना पडा
लडकी खुश हो गई
इस बीच दोनों बाहर आ गए
मददगार का मोबाइल अंदर रह गया था
उसने दोबारा दरवाजा खोला
मददगार शख्स ने लडकी की ओर देखा
आंखों में कुछ बात थी
दोनों घर के अंदर
कमरे में बैठ गए
आफिस की दिक्कतों से बात शुरू हुई
लडकी को सपोर्ट करने की बात बताई गई
बातों ही बातों में मददगार
उसके पास आ गया था
लडकी को पता चलने से पहले
उसका हाथ मददगार पकड चुका था
लडकी बिदक गई
उसने विरोध किया
मददगार ने हाथ नहीं छोडा
लडकी रोने लगी
मददगार अडा रहा
वह उसके कपडे उतार रहा था
कमरे में वह इधर उधर
भागती रही
मगर उसके कदम
रूक गए
लडकी रोती जा रही थी
उसने मददगार को एक जोरदार चांटा
मारा विरोध किया
सर यह गलत है सर
ऐसा मैं नहीं कर सकती
प्लीज
मैं मर जाउंगी
मगर पता
नहीं क्यों
उस दिन लडकी
ज्यादा देर तक
मना नहीं कर पाई
नए कपडे
उतार दिए गए
मददगार ने सेक्स किया
लडकी ने जिस्म को झेला

लडकी देर तक राती रही
जमाने की तस्वीर उसके सामने थी
गरीब मां बाप
प्रेमी, दोस्त
बेदर्द जमाने में वह लुट चुकी थी
वह मरना चाह रही थी
मददगार ने समझाया
एक घंटे बाद
दोनों आॅफिस पहुंचे
उस रात को
लडकी सो नहीं पाई
मददगार
उसके साथ सपने में दुराचार करता रहा
सुबह बोझिल सी
कुछ खोई सी
रूआंसी होकर
आॅफिस
पहुंची

अगले दिन

मगर यह क्या
लडकी की पूरे आॅफिस में चर्चा थी
मददगार ने उसकी
खबर की खूब तारीफ की थी
लडकी मीडिया में थी
दो दिनों बाद
वह प्राइम टाइम की एक्सक्लूसीव खबर कर रही थी
जल्द ही
उसका प्रमोशन हो गया
जिस्म झेलना उसकी मजबूरी बन गई थी
वह सिगरेट और शराब पीने लगी थी
खोई खोई सी रहती थी
मददगार ने उसकी हर इच्छा पूरी की थी
बगैर कुछ कहे और
बहुत कुछ पाकर

उसे पैसे चाहिए थे, उसे कई प्रमोशन मिले
नाम चाहिए था, प्राइम टाइम में मौका दिया गया
शोहरत चाहिए थी, मशहूर एंकर बन चुकी थी;

उधर लडके से वह आम दिनों की तरह मिलती रही
वह उससे आज भी उतनी ही मोहब्बत करती थी
बेईंतहा मोहब्बत
अपने जानू के लिए वह कई सामान खरीदती
लडका खुश हो जाता
दोनों साथ बिताते
उस दौरान वह लडकी
नार्मल दिखने का प्रयास करती
इस बातों और मजबूरियों से अनजान
लडके को पता नहीं चला कि
उसक दुनिया कितनी बदल चुकी थी
एक बार फिर
वक्त ने करवट ली
कुछ दिनों बाद
चैनल में
मददगार की स्थिति
कमजोर होती गई
राजनीति का दांव इस बार उल्टा पडा था
वह नौकरी छोडकर चला गया था
लडकी
अकेली रह गई थी
रात को बहुत दिनों बाद
उसे बस में जाने की जरूरत पडी थी
उसने पुराने दोस्त को फोन किया
बाइक वाले सहकर्मी आ गया
मगर
दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई
घर पर
उस रात
लडकी को नींद नहीं आई
करवट बदलती रही
अपने प्रेमी के बारे में सोचती रही
उसे याद आया
बीते कई माह से
उसे नींद आनी कम हो गई थी
नींद की गोली
उसकी जरूरत बन चली थी
इधर घरवाले
लडकी से कुछ
और पैसों की डिमांड करने लगे थे
रात को ऐसे लगा
उसे लगा
उसका प्रेमी
उससे दूर होने लगा था
वह कितनी कोशिश कर रही थी
मगर वह दूर जा रहा था
सपने में अब
मोहब्बत के बजाए
दिखने लगी थी दूरियां

छुटृटी वाले दिन
कई माह बाद
दोपहर को
दोनों पुराने प्रेमी
दोबारा मिले
दोनों ने शिकायत की
अब तुम पहले जैसे नहीं रहे
उस दिन भी
लडकी के फोन पर
आॅफिस से फोन आते रहे
इधर शाम को जब
दोनों एक दूसरे में खोने लगे थे
तभी
उन निजी क्षणों में
लडकी का फोन
रिंग करने लगा
सेक्स छोडकर
वह फोन पर बात करने लगी
बात जब थोडी लंबी हो गई तो
लडके को सहन नहीं हुआ
वह बाथरूम चला गया
वापस कमरे में दाखिल
होते वक्त लडकी ने पूछा
कहां चले गए थे
तुम तो
कुछ कर ही
नहीं सकते
बात कहीं चुभी थी
खैर
दोनों में
बातचीत हुई
दोबारा सेक्स भी हुआ
साथ मरने जीने
की कसमें
खाकर दोनों विदा हुए
इधर
लडके की नौकरी पर खतरा मंडराने लगा
उसके यहां माहौल ठीक नहीं था
मंदी की
ताजतरीन मार
सब पर पडने लगी थी
इस बीच
लडके ने
नौकरी के लिए
उसी मददगार को फोन किया
फोन पर मददगार ने उसके काम की सराहना की
पर नौकरी देने से इंकार कर दिया
लडकी को फोन कर वह कुछ
बताने वाला ही था कि
लडकी का फोन आया
मददगार शख्स की बात बताते हुए
लडकी बोल रही थी
सर ने मुझे नई नौकरी दे दी है
ओफ वह कितने अच्छे है
मैं तुम्हारे लिए भी
उनसे बात करूं
क्या
लडके ने मना करते हुए
फोन काट दिया
आज
वह कुछ हार गया था
पुरानी उस दिन वाली बात याद आई
सेक्स के दौरान
फोन आने की घटना
कमाल है लडकी फोन
उस वक्त वह फोन कैसे
उठा सकती थी
वह कुछ उलझन में था
सामने दीवार थी
हाथों में फोन था
अचानक आए
गुस्से ने फोन और दीवार का
तालमेल करा दिया
फोन जमीन पर टुकडो टुकडो में पडा था

-
फिर नई नौकरी

लडकी को नई नौकरी मिल चुकी थी
वह खुश थी
उसे प्रेमी से ज्यादा पैसे मिलते थे
अंदर ही अंदर
उसे इस बात का गहरा सकून मिल रहा था
उधर दोनों की बातचीत अब
आफिस खबर और पैसे को
लेकर ही होती थी
शादी और कसमें भी
इसका हिस्सा हुआ करती थी
मगर कभी कभी

अब दोनों नए तल पर थे
इस बार लडकी उंचे तल पर थी
उसके पास अच्छी नौकरी और पैसा था

इस बीच
मददगार ने एक और दांव खेला
लडकी को बुलाया
बोला यार
हमारे
यहां प्राइम टाइम में लिए स्लाॅट खाली है
लडकी ईशारा समझ चुकी थी
उसके मुंह से गालियां निकल रही थी
लडकी ने गाली देते हुए सिगरेट सुलगाया
कुछ सोचने के बाद
वह राजी थी
मगर दिक्कत कुछ और थी
प्राइम टाइम का प्रोडयूसर कोई और था
सीधे कहे तो
इस लडकी को
उसे खुश करना था
हर तरह से
वह इसके लिए तैयार नहीं थी
मददगार बोलता रहा
वह सुनती रही
सिगरेट को जमीन पर फेंकते हुए बोली
कहां जाना होगा
अगली सुबह
वह
प्रोडयूसर के घर पर थी
उस काले मोटे को देखकर
वह कांप गई
मोटा सब कुछ एक बार में ही पाना
चाहता था
मोटा उसके सामने अपना नंगा जिस्म लेकर
खडा था
लडकी ने मुंह बंद किया
आंखों से आंसू आ गए
वह उसे झेलती रही
मोटा उसे नोंचता खसोटता रहा
लौटते वक्त
कार में बैठी
लडकी सोच रही थी
राक्षस साला
आगे तो देखा भी नहीं
सिर्फ
पिछे ही
खैर
जल्द ही
उस चैनल में
प्राइम टाइम का शो
चलने लगा था
लडकी स्टाॅर बन चुकी थी

इधर लडका भी नई नौकरी तलाश चुका था
उसे बेहतर पैसे मिलने लगे थे
अपनी नौकरी से खुश था
शादी करना चाहता था
रोज टीवी पर होने वाली बीबी को देखता था
अब तो उसके
घरवाले भी देखते थे
वह फोन करता
तो वह बिजी रहती
सुबह से शाम तक
बिजी
रात को भी बिजी
कुछ टूट रहा था
दोनों के बीच

शायद
नीले भंवर का रंग हल्का हो चला था
प्रेम का प्रवाह मंद पडने लगा था
दोनों
शादी के फैसले के बारे में
दोबारा सोचने लगे थे
बडे दिनों बाद
उस रात
लडक ने शराब पी
खूब पी
अब वह रोज
शराब पीता था
लडकी के बारे में सोचता था
उसके सपने का क्या होगा

उधर
लडकी के नए चैनल में
प्रोडयूसर को तीन माह बीत चुके थे

अब प्रोडयूसर भी तंग आ चुका था
रोजाना एक ही जिस्म से तंग आ चुका था

मददगार का फोन आया लडकी के पास

बोला यार तुम कुछ दिनों के लिए छुटटी ले लो
लडकी समझ नहीं पाई
पर राजी हो गई

उसे शिमला जाने के पैसे दिए गए
मददगार से साथ जाने से इंकार कर दिया
काला प्रोडयूसर जा नहीं रहा था
अब उसने प्रेमी को फोन किया

दोनों शिमला गए
साथ
मददगार के पैसे पर
शिमला का मजा

रात को जब दोनों
बिस्तर पर थे
लडकी उसे शराबी हो जाने पर भला बुरा बोल रही थी
लडके के सामने आज उसने पहली बार शराब पी थी
दोनांे साथ साथ शराब पी रहे थे
सामने टीवी आॅन था
तभी उसके चैनल पर प्राइम टाइम का स्लग दिखा
सामने एक
नई खुबसूरत लडकी दिखी
अरे
लडकी चिल्लाई
यह कैसे हो सकता है
उसने सीधे प्रोडयूसर को फोन किया
प्रोडयूसर का फोन बिजी था
मददगार को फोन किया
इधर लडका हैरान था

फाॅरप्ले के बाद सेक्स से ऐन पहले
लडकी का फोन पर बिजी हो जाना
परेशान हो जाना
उसे कुछ समझ में नहीं आया
वह चिल्लाया

उधर लडकी फोन पर चिल्ला रही थी
टीवी पर
वह नई वाली एंकर
चिल्ला रही थी
शोर हर ओर शोर
लडकी बोली
मददगार यह क्या है
मददगार ने उसे समझाने की कोशिश की
उसने साफ कहा
तुम्हारी टीआरपी डाउन हो रही थी
अब ज्यादा टीआरपी चाहिए
इसलिए नई लडकी लाई गई थी

लडकी ने फोन फेंक दिया
नंगे बदन ही खिडकी के पास पहुंच गई

कुछ घंटे बाद
वहां सन्नाटा था

रात के उस सन्नाटे में
कई गुमनाम चीजें थी
किसी के रोने की आवाज थी
एक घुटन
कई सवाल
हवा में
तैर रहे थे
शराब की बदबू
(अगर आप चाहें तो खुशबू भी मान सकते हैं) थी
लडकी उल्टी पडी थी
नींद शराब और frustration
लडके की नींद टूटी
उसने
सामने पडा जिस्म देखा
उसका
frustration
सामने आ गया
वह कुत्तों की तरह
उस पर टूट पडा
वह प्यासा था
सब कुछ
खा जाना चाहता था
एक ही बार में
समूचा
वह पागल हो गया थ
अंधा पागल
कई दिनों का frustration
सामने आ गया था
लडकी चिल्लाइ
लडकी र्का
frustration
बाहन निकला
वह गुस्से में थी
लाल
चिखती हुई बोली
तू भी मेरी मारना चाहता है
ले मार ले
घुसा दे अंदर
बुझा ले प्यास
frustration
लडके ने वैसा ही किया
मगर दूसरे ही सेकेंड ठिठका
उसने कुछ सुना था
तू भी मेरी मारना चाहता है
हां यही शब्द थे
उसकी होने वाली बीबी के
वह
रूक गया जोश ठंडा पड गया
उसने पूछा
तू भी का मतलब क्या है
अरे यार कुछ नहीं
लडकी ने कहा
वह डर गई
लाल चेहरा
फक पड गया
मैं सपना देख रही थी
मुझे लगा ..
कोई मेरे साथ
जबरदस्ती कर रहा है
..
लडका समझ चुका था
frustration
लडकी भी समझा चुकी थी
..

सुबह
सामान पैक था
दोनों ने
टूर कैंसल कर दिया
बताते हैं
कई दिनों तक
दोनों में बात नहंी हुई
फोन पर घंटों चिपके रहने वाले
एक
मिस काॅल करने और पाने को तरस गए
एसएमभी नहीं भेजा
इधर

चैनल में लडकी की टीआरपी डाउन हो चली थी
लडका काम और उस लडकी के बीच उलझ चला था
तभी
नियती का एक और पासा
खतरनाक खेल

एक ब्रेकिंग न्यूज

लडके को मिली
अरे यार
उस चैनल में
एक प्राइम टाइम एंकर थी
अभी तीन माह पहले आई थी
जिसकी चर्चा है बहुत आज कल
हां
याद है ना
शायद
तू तो उसे जानता है
ना अरे नहंी
क्या हुआ ?
उसका एमएमएस आया है नया
वह देखना नहीं चाहता था
पर दोस्त को मना नहीं किया
ब्लूटूथ से
एमएमएस लेते वक्त
लडके को
पसीने आ गए
प्राडयूसर ने
उसके साथ गुजारे निजी
वक्तों का
एमएमएस बनाया था
बेहद अश्लील

"tu भी मेरी मारना चाहता है"

उसे बहुत कुछ
समझ आ चुका था
रात
उसे नींद नहीं आई
तनाव में उसने गोलियां खा ली
20 नींद की गोलियां

लडकी भी बेहद तनाव में थी
तनाव कम
पछतावा ज्यादा
बेचारगी भी छुपी हुई
सामने
गरीब मां बाप
और
दूर जाते
प्रेमी की तस्वरी
सी चल रही थी
बेददर्ज जमाने की रूखी तस्वीर
वह प्रोडयूसर का
खून करना चाहती थी
मददगार को मौत देना चाहती थी
मगर वह
ऐसा कर नहीं पाई
शराब पीकर उसने
कुछ गोलियां खा ली


नियती देखिए
दोनों एक ही अस्पताल में लाए गए थे
दोनों ने ही नींद की गोलियां खाई थी
दोनों ने शराब भी पी थी
उस अंधेरी और सर्द रात को

सरकारी अस्पताल के डाॅक्टर
उन दोनों को बचा नहीं पाए
मौती जीत गई
जिंदगी हार गई
उन दोनों का
अंतिम संस्कार
अलग अलग हुआ
दोनों की रूह
उनके जिस्म से निकल
कर आमने सामने बैठ गई
उनमें भी
बात तक नहीं हुई
कोई संवाद नहीं हुआ
एक सन्नाटा सा छा गया
मगर
दोनों
किस वजह से मरे
इसका उत्तर आपको देना होगा

शुक्रिया

अभय

Tuesday, December 2, 2008

एक उत्तर भारतीय का दर्द

ये सन्देश मुझे मेरे एक साथी ने जो मुंबई में रहता है ने ऑरकुट पर भेजा है

anjule:
कहाँ हैं राज ठाकरे.....और उसकी बहादुर gundo ki ''महाराष्ट्र नव-निर्माण सेना' ?? उसको बताओ.....200 एन0 एस0 जी0 कमांडोज़ ( जिनमें कोई 'मराठी-मानुष' नहीं है....सब या तो उत्तर भारतीय हैं या दक्षिण भारतीय) जो भेजे गए उसकी तथाकथित 'आमची मुंबई' को आतंकवादियों से बचाने के लिए. जिन्होंने इसलिए अपनी जान दी ताकि 'वो' जिंदा रह सके......जिन्होंने इसलिए अपनी नींदों की कुर्बानियां की ताकि 'वो' चैन से सो सके. जिन्होंने अपने लहू की सुर्खी से "आमची मुंबई'' नहीं ''अपनी मुंबई'' के माथे पर अपनी शहादत से तिलक कर दिया...........मुंबई किसी के 'बाप' की नहीं....''भारत माँ'' की है. हर हिन्दुस्तानी की है.....बिल में छिपे 'भाषावादी चूहों' से कह दो की अब वो बाहर आ जाएँ, बहादुर शेरों ने.....(वो चाहे किसी भी फोर्स के हों .....किसी भी राज्य के हों) मुंबई के खूबसूरत गुलिस्तान में घुसे वहशी भेड़ियों के कायर कलेजे अपने जूतों की एडियों के तले मसल कर रख दिए हैं.....!!!
इस मुठभेड़ में शहीद हुए हर बहादुर हिन्दुस्तानी की शहादत को सलाम.......!!!!

Sunday, October 26, 2008

दीपावली जादू है।

यह लेख मुझे मेरे एक मित्र अभय ने दीपावली के सन्देश के रूप में भेजा है मुझे लगा शायद ये हम सब की कहानी है इसलिए ये आप सब के लिए


दीपावली जादू है।

तिलिस्म है अनोखा।

आपको एेसा नहीं लगता!!!

मैं तो बड़ी शिद्दत से इस बात को महसूस करता हूं।

चाहे किसी भी जगह सदियों से कोई रोशनी नहीं गई हो।

अंधेरा जम कर सर्द और घना हो गया हो।

कुछ भी साफ न हो।

वहां भी रोशनी के आते ही जादू होता है।

बस एक किरण अाैर अंधेरे का खात्मा ।

काफूर हो जाता है।

है ना जादू ।

दोस्तों एक बार फिर दीपावली करीब आ गई है।

भागदौड़ से भरी इस नौकरी में भी कुछ दिन होते है जब हम अपने जड़ों की ओर अनायास ही लौट जाते हैं। एेसे ही चंद दिनों में यह त्यौहार भी शामिल है। इस त्यौहार पर मैं जहां भी रहा घर की कमी या अपनों के साथ न होने के एहसास से साराबोर रहा। सच में मुझे घर की बहुत याद आती है। मां-बाप, भाई-बहन, पुराने दोस्त, मोहल्ले के रास्ते, कुछ हंसी , कुछ पकवान, पेंट की खुशबू, नए कपड़े, दीप और तेल, बिजली के झालर, बचपन की बेफ्रिकी और घर पर होने वाली पूजा में देरी, पटाखों का उल्लास। बता नहीं सकता हर चीज की जबरदस्त कमी महसूस होती है। मुझे कई दीपावली याद है। हमारे यहां हर साल इसी रात को रजाई ओढऩा शुरू करते थे। तमाम बातें है। भूली बिसरी सी। एेसा लगता है यादों के झरोखा बड़ा होकर दरवाजा बन जाता हो। ज्यादा नहीं कुछ साल पहले की बात है। हमलोग साथ ही यह त्यौहार मनाते हैं। आज सब अलग-अलग है। सालों हो जाते हैं एक साथ मिले।

फिर दीपावली आई है।

मौका है।

पर साथ नहीं है।

घर पर मां बाप अकेले होंगे।

फोन पर दीपावली मना ली जाएगी।



किसी की प्रेमिका होगी ।

वह उसके साथ दीपावली मनाएगा।
कोई दोस्तों के साथ मौज मस्ती करेंगे।

बहरहाल पहली बार मैं मेरठ में रहूंगा। अभी डेढ़ माह पहले ही यहां आया हूं। ना तो मैं मेरठ को और ना ही यह शहर मुझे जानता है। एेसे में यहां दीपावली मनाना एक नया अनुभव होगा। मैं तो पूरी तरह तैयार हूं। दीपावली मनाने के लिए । हालांकि मेरी उम्मीद और तैयारी का बड़ा दारोमदार उससे पहले मिलने वाले वेतन पर निर्भर करेगा।

मेरी ओर से आप तमाम लोगों को इस पर्व की ढेर सारी शुभकामनाएं।

दीपावली की शुभकामनाएं।

आशा है आप इस अवसर का पूरा आनंद उठा पाएंगे।
यह आपकी जिंदगी को रौशन करेगी।


है ना जादू।

Happy Diwali To you and Your Family

Let the festivity embrace you..

let there be light


regards

abhay
HT Media LTd
Meerut

Tuesday, October 7, 2008

टी.आर.पी. का खेल

Friday, September 26, 2008

वेलकम टु सज्जनपुर "फिल्म हिट"


रुपेश गुप्ता
लोग कहते हैं कि हिट फिल्म के लिए कोई फार्मूला नहीं होता.लेकिन फिर भी कुछ तत्वों का होना फिल्म में ज़रुरी माना जाता है,
जिसके बिनाह पर कहा जा सके कि फिल्म हिट हो सकती है. ये बातें फिल्म को हिट कराने की संभावनाएं बढ़ा देती है. चलिए पहले
इन तत्वों को तलाशते हैं जो अच्छी फिल्म की निशानी के तौर पर देखी जा सकती है, कहानी और प्रस्तुतीकरण के इतर.
अच्छी स्टारकास्ट, हिट गाने, शानदार लोकेशन्स, मार्डन कपड़े और सपनों की दुनिया- जहां जहां ज़िंदगी के कड़वे हकीकत न हों

ताकि दर्शक तीन घंटे स्वप्नलोक में विचरण कर सके.इन सबके अलावा इंटरनेशनल तकनीक जो फिल्म को आधुनिक लुक दे.
इसमें शानदार इडिटिंग से लेकर विसुअल इफेक्ट तक शामिल हैं. अगर किसी फिल्म में ये तमाम बातें होंगी तो फिल्म के हिट
होने की संभावना ज़्यादा होगी. ग्रामीण पृष्ठभूमि की स्टोरी में इन तत्वों बातों की गुंजाइश काफी कम हो जाती है,और उसके नाकाम होने की
संभावनाएं बढ़ जाती है.इसलिए ग्रामीण परिवेश की फिल्में बनाना जोखिम से भरा माना जाता है और यही वजह है कि पिछले दो दशक से
ग्रामीण पृष्ठभूमि पर फिल्में बननी करीब-करीब बंद हो चुकी हैं. लगान और मालामाल वीकली इसके अपवाद हैं, ये फिल्में दुहस्साहस का विजयी
नतीजा हैं.जो ग्रामीण पृष्ठभूमि के बाद भी सफल रहीं.

अगर बात दुस्साहस की करें तो सबसे बड़ा दुस्साहसी काम श्याम बेनेगल ने किया है,वेलकम टु सज्जनपुर में. न गाने सुपर हिट हैं न ही
सुपरहिट स्टार कास्ट. और फिल्म भी ऐसे गांव की है जिसके माहौल से परिचय शहरी तबके का परिचय कम ही होगा. सुविधाविहीन गांव.
लेकिन इसके बाद भी एक शानदार और यादगार फिल्म. ये लोगों को एक
नया ज़ायके का मज़ा देती है.
अगर इसके स्टाकास्ट की बात करें तो,श्रेयस तलपड़े स्टार बनने की जद्दोजहद कर रहे हैं, तो अमृता राव कुछ एक फिल्मों के बाद उसकी
कामयाबी को कायम नहीं रख पाईं. बाकी स्टारकास्ट की बात करें तो कोई नाम ऐसा नहीं है जिसके लिए दर्शक फिल्म देखने चले आएं.लेकिन इन
छोटे स्टार और अच्छे कलाकारों ने ऐसा काम किया कि पूछिए मत. श्रेयस तलपड़े अपने पात्र में इतना डूबे हैं कि कहीं भी श्रेयस आपको
नहीं दिखेगी, हर जगह कहानी का मुख्य पात्र महादेव ही नज़र आएगा.और अमृता राव, जैसी खूबसूरती वैसी मासूमियत.ऐसी मासूमियत कि काफी
दिनों बाद याद आया कि हम हिंदुस्तानी खूबसूरती को एक और नाम से जानते हैं मासूमियत. खूबसूरती ऐसी कि मर मिटने को दिल चाहेगा.आपको
ये भी समझ में आ जाएगा कि गर्दन से नीचे नज़र न जाने का मतलब क्या होता है.कुछ दिन बाद फिर से ये खबर पढ़ने को मिल जाए कि मकबूल
फिदा हुसैन कमला यानी अमृता पर पेंटिग बनाएंगे. पूरी गारंटी है कि फिल्म देखने के बाद घूंघट में कुछ छिपा, कुछ झांकता कमला का चेहरा
आपकी आंखों के सामने नाचता रहेगा.और अगर उसके पति से जलन होने लगे तो यकीन मानिए आप इकलौते नहीं हैं

फिल्म की कहानी गांव की है, और काल्पनिक नहीं-हकीकत के इर्दगिर्द। फिल्म की कहानी हमारे समाज में हाल के दिनों में घटी तमाम
असल घटनाओं के ज़िक्र या चित्रण से आगे बढ़ती है. चाहे वो किडनी का काला कारोबार हो या फिर बेरोजगारी और उससे पैदा हुए पलायन से
कैसे घर बार की सामान्य खुशियां तार तार हो जाती हैं, बड़ी ही सफाई से दिखाया गया है. यह फिल्म इन समस्याओं के जड़ में पहुंचती है और
इन समस्याओं का समाज में असर दिखाती हैं, संवेदनाओं के साथ. जहां तक खबरें नहीं पहुंच पाती.हिरोईन सुन्दर है.लेकिन उसकी सुंदरता घुंघट में
कैद रहती है.जब घुंघट से बाहर निकलती है तो चेहरे से नीचे आपकी नज़र नहीं जा सकती.
फिल्म की जान है इसकी कॉमेडी. जो बड़े ही स्वाभाविक हैं.किसी को तोतला या लूला बनाकर कॉमेडी को ठूंसने की कोशिश नहीं की गई है.न ही
आपको हंसने के लिए लॉजिक को घर छोड़कर आने की ज़रुरत है. बल्कि यहां त्रासदियों से भी हंसी निकालने की निर्देशक ने सफल कोशिश की है.

Friday, June 13, 2008

सब कुछ सीख कर भी तुम कुछ न सीख सके

इन अंधेरों में, मैं रोशनी की किरण तलाशता रहा,
कुछ इस तरह से मैं अपनी ज़िंदगी तराशता रहा ।

मुझको पाने की मंज़़िल नहीं कोई ख्वाहिश
मेरी मंज़िल तो बस मेरा रास्ता रहा।

ऐसी ज़िंदगी की नहीं ई हसरत
जिसका बस लालच से ही वास्ता रहा

सफर तो यूं सभी करते हैं पूर्ण जिंदगी का
किसी का तेज़, किसी का आहिस्ता रहा

सब कुछ सीख कर भी तुम कुछ न सीख सके मानव
जिस ने चाहा परखा तुम्हे जिसने चाहा वो जांचता रहा

पंकज रामेन्दू मानव

Saturday, April 26, 2008

ख्वाहिश

अंजुले श्याम मौर्य 'एडिट वर्क्स स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन' में बी.एस.सी. इलेक्ट्रानिक मीडिया के द्वीतीय वर्ष के छात्र हैं। ये अपनी एक प्यारी सी अभिव्यक्ति के साथ 'मुद्दा' पर हाज़िर हैं।

अंजुले श्याम मौर्य

काश, यह ज़िन्दगी
खुशनुमा इक पथ होता
साथ में इक खूबसूरत हमसफर होता
बातों-बातों में यूं रास्ता नप जाता
पमारे होंठो पे जो कोई मोहब्बत भरा तराना होता
इस तरह हमारा सफर 'आशिकाना' होता।

काश हमारे बीच
कोई समझौता होता
प्रेमभरा कोई घरौंदा होता
तो मिल बैठ कर दो-चार, मीठी-तीखी बातें होंती
जहाँ रूठने-मनाने का इक 'िसलसिला' होता
फिर धीरे-धीरे मशहूर हमारा 'फसाना' होता

काश मेरा देखा
हर सपना सच होता
मैं ख्वाहिशों के द्वीप में सो रहा होता
हर शाम जहाँ सपनों की बारिश और आरजू के ओले गिरते,
यहाँ न कोई ख्वाहिश और न सपना अधूरा होता
काश ऐसा ही दिलचस्प अपना 'आशियाना' होता।