आजादी के बाद पहली बार है देश के जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान मैन्यूफैक्चरिंग सेकम है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक 2009-10 के जीडीपी में मैन्यूफैक्चरिंग योगदान7,19,975करोड़ रुपए(16.1%)है,
जबकि कृषि,वानिकी वफिशिंग का योगदान 6,51,901करोड़ रुपए (14.6%) है। लेकिन उद्योग के बढ़ने
के बावजूद वहां रोजगार के अवसर नहीं बढ़े हैं। कृषि पर न...िर्भर आबादी70करोड़ होगी,उद्योग पर बमुश्किल 15 करोड़।सरकार रोजगार के आंकड़े नहीं देती-अर्थकाम
Friday, June 4, 2010
Wednesday, June 2, 2010
प्रोफेसनल कोर्स या सामान्य कोर्स

हाल ही में सभी बोर्ड के परिणाम घोषित हो चुके हैं। सर्वप्रथम सभी सफल अभ्यर्थियों को हार्दिक बधाई!
परिणाम घोषित होते ही हर अभ्यर्थी और उसके पिता कॉलेज में एडमिशन के भागदौड़ में शामिल हो चुके हैं।
संजय हाल ही में बारहवीं पास किया है। उसके पिता श्याम सुंदर चाहते हैं कि उसका पुत्र साइंस से ग्रेजुएशन करे, लेकिन संजय कंप्यूटर या मीडिया में अपना कॅरियर संवारना चाहता है। संजय का सोचना सही है। सामान्य कोर्स करने के बाद कोई प्रोफेशनल कोर्स करने में समय अधिाक लगता है। इसलिए बारहवीं के बाद ही प्रोफेशनल कोर्स करने पर समय की बचत हो सकती है।
वर्तमान समय में प्रोफेशनल कोर्स की डिमांड है। सामान्य स्नातक को नौकरी में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट का भी यही मानना है कि भारत में 90 प्रतिशत ग्रेजुएट नौकरी के लायक नहीं हैं। उदारीकरण के बाद भारतीय कंपनियां विदेशी कंपनियों से प्रतिस्पध्र्दा करने के लिए कुशल कामगारों की मांग बढ़ी। रोजगार तो बढ़ा लेकिन कुशल लोगों की कमी बनी रही। यही वजह है कि हॉस्पिटेलिटी, टूरिज्म, रिटेल, प्रबंधान, बीमा, टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में जितने कुशल लोगों की डिमांड है उतना मिल नहीं पा रहा है। इन सभी क्षेत्रों की वर्तमान जरूरतों के हिसाब से सामान्य शिक्षा ग्रहण करना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए आवश्यक है प्रोफेशनल कोर्स की। भविष्य में प्रोफेशनल्स की कमी की आशंका को देखकर ही सरकार ने शिक्षित युवाओं को कुशल पेशेवर बनाने का निर्णय लिया है जिसके तहत स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोले जाएंगे।
असमंजस का शिकार
लंबे समय से स्कूल के अहाते से बाहर निकलकर छात्र कॉलेज-विश्वविद्यालय जैसे बृहद संसार में प्रवेश करते हैं। बारहवीं के बाद ऐसे चौराहे पर खड़े होते हैं, जहां से एक खास रास्ते का चुनाव करना होता है। ऐसा रास्ता चुनना होता है जो उनकी मनपसंद कॅरियर के मुकाम तक पहुंचाता है। पहले की अपेक्षा अब विकल्पों की कमी नहीं है। अधिाक विकल्प होने की वजह से विद्यार्थी में असमंजस की भी स्थिति भी उतनी होती है। इसी समय विद्यार्थी को तय करना होता है- प्रोफेशनल कोर्स या फिर सामान्य कोर्स।
कमी नहीं विकल्प की
वर्तमान में परंपरागत विषयों के साथ-साथ सैकड़ों नये विकल्प सामने उपलब्धा हैं। इन विकल्पों में से कई ऐसे विकल्प हैं जो विगत कुछ वर्षों में अपनी उपस्थिति बहुत ही प्रभावशाली ढंग से दर्ज किया है। आइए, ऐसे ही क्षेत्रों के बारे में जानते हैं:
एनीमेशन: विगत वर्ष हनुमान और रोडसाइड रोमियो जैसे एनीमेशन फिल्मों के साथ भारतीय कंपनियां और स्टूडियो इस ओर कदम बढ़ाया है। भारत में कम कीमत पर फिल्म तैयार हो जाने के कारण भी कई विदेशी प्रोडक्शन कंपनियां यहां फिल्म बनाने के लिए समझौता किया है। इसी कड़ी में यशराज फिल्म्स ने वाल्ट डिजनी के साथ समझौता किया है। फिक्की की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2007 में यह उद्योग लगभग 0.31 बिलियन डॉलर का था जो वर्ष 2012 तक 24 प्रतिशत की वृध्दि दर्ज कर 0.94 बिलियन डॉलर का हो जायेगा।
मीडिया-एंटरटेनमेंट: मंदी के कारण मीडिया एवं एंटरटेनमेंट उद्योग पर असर पड़ा, लेकिन छात्रों का इस क्षेत्र कोर्स के प्रति रूझान कम नहीं हुआ है। फिक्की के एक रिपोर्ट के अनुसार यह उद्योग वर्ष 2011 तक एक लाख करोड़ रुपये तक का हो जायेगा। इस क्षेत्र में फिल्म प्रोडक्शन से लेकर टीवी चैनलों में काफी अवसर उपलब्ध हैं।
टेलीकॉम: सरकार कई नयी टेलीकॉम कंपनियों को लाइसेंस प्रदान कर रही है और भारत में एक नयी पीढ़ी (थ्री जी) की मोबाइल सेवा लांच किया गया है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में नये तकनीक का विस्तार होगा जिसके लिए लगभग डेढ़ लाख प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी। एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2010 तक भारत में 500 करोड़ मोबाइल उपभोक्ता हो जायेंगे। इस क्षेत्र में टेलीकॉम सॉफ्टवेयर इंजीनियर, टेलीकॉम सिस्टम सॉल्यूशन इंजीनियर, कस्टमर सर्विस एक्जीक्यूटिव और टावर कनेक्शन जैसे में बेहतर संभावनाएं हैं।
लॉ: विगत कुछ वर्षों से परंपरागत कॅरियर के अलावा इस क्षेत्र में एक नया कॅरियर उभर कर सामने आया है लॉ प्रोसेसिंग आउटसोर्सिंग (एलपीओ)। एलपीओ काफी तेजी से विकास कर रहा है। नैस्कॉम मार्केट इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार भारत में एलपीओ कारोबार 2010 तक छह अरब डॉलर को पार कर जायेगा। इसके अलावा बहुराष्ट्रीय कंपनियों में लीगल एडवाइजर और कंसल्टेंट जैसे पद के लिए काफी डिमांड बढ़ा है।
बीमा: बीमा क्षेत्र हमेशा से ही आसानी से उपलब्धा हो जाने वाला कॅरियर रहा है। इस क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोल दिये जाने के बाद इसमें काफी रोजगार सृजन हुए। इतने के बावजूद भारत की लगभग मात्र 22 प्रतिशत लोग ही बीमा करवा पाये हैं, जबकि अमेरिका और यूरोपीय देशों में लगभग शत-प्रतिशत लोग अपना बीमा करवाए होते हैं। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने निजी कंपनियों से मिल रही चुनौतियों का सामना करने के लिए वर्ष 2011 तक 11 लाख एजेंट भर्ती करने की योजना है। इसके अलावा रिलायंस लाइफ 90 हजार, मेटलाइफ इंडिया 32 हजार और टाटा एआईजी लगभग 27 हजार लोगों को भर्ती करने की योजना है।
बैंकिंग: वैश्विक मंदी के बावजूद भी भारतीय बैंक इन दिनों काफी विकास कर रहा है। साथ ही अपने विस्तार के लिए नयी भर्तियां भी कर रहे हैं। हाल ही में देश की सबसे बड़ी बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने 25 हजार लोगों को भर्ती करने की घोषणा की है। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अमूमन हर हफ्ते नये भर्ती की घोषणा होती रहती हैं। निजी क्षेत्र के भी कई बैंकों में नयी भर्तियां हो रहे हैं। आने वाले दो वर्षों में निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी बैंक आईसीआईसीआई बैंक एक लाख लोगों को रोजगार प्रदान करेगी।
मैनेजमेंट: मंदी के बावजूद कैंपस प्लेसमेंट कम नहीं हुआ है। मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए छात्रों का रूझान भी कम नहीं हुआ है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कैट परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों में निरंतर बढ़ोतरी हुई है। बी-स्कूलों में दाखिला के लिए देश में कई एंट्रेंस टेस्ट आयोजित किये जाते हैं। इनमें से किसी परीक्षा में शामिल होकर बेहतर अंक प्रतिशत के साथ पसंदीदा बी-स्कूल में दाखिला लिया जा सकता है।
हेल्थ सेक्टर: प्राइसवाटरहाउसकुपर्स के अनुसार, हेल्थ सेक्टर 2012 तक 40 बिलियन डॉलर का हो जायेगा। इस क्षेत्र में आगामी कुछ वर्षों में लगभग 60 अरब डॉलर निवेश की संभावना है। जापान की कंपनी दाइची सैंक्यो ने भारत की सबसे बड़ी फार्मा कंपनी रैनबैक्सी का अधिाग्रहण किया है। इसके अलावा कई विदेशी कंपनियां अपनी इकाई भारत में खोल रहा है। साथ ही भारत में मैनपावर की कम कीमत होने की वजह से अपने शोधा कार्य भी भारत में करवा रहे हैं। इसके लिए काफी प्रोफेशनल्स की मांग होगी।
टूरिज्म: नवंबर माह में मुंबई में हुए आतंकी हमले के बाद भारत में विदेशी सैलानियों के आने में कमी दर्ज की गयी थी लेकिन विगत कुछ माह में सुधारे हालात के बाद सैलानियों के आने की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। वर्ल्ड ट्रेवल एंड टूरिज्म के मुताबिक भारत ने वर्ष 2008 में टूरिज्म से लगभग 100 बिलियन डॉलर की कमाई अर्जित की है जो वर्ष 2018 तक 9.4 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़कर 275.5 बिलियन डॉलर का हो जायेगा। हाल के वर्षों में भारत ने मेडिकल टूरिज्म से भी काफी घन किया है।
क्या करें, क्या न करें
कोर्स चुनने से पहले अपनी रुचि, क्षमता व कॅरियर विकल्प पर विचार अवश्य करें।
दूसरों की देखा-देखी में कोर्स का चयन न करें। पारंपरिक कोर्स के बजाय नये विकल्पों पर भी विचार करें।
अनिर्णय की स्थिति में काउंसलर की सलाह लें।
लक्ष्यहीन या दिशाहीन पढ़ाई न करें।
जिस संस्थान से कोर्स करना चाहते हैं, उसकी मान्यता के बारे में पता जरूर कर लें।
कोर्स चुनते समय कॅरियर से संबंधिात विकल्प संभावनाओं का भी धयान रखना चाहिए।
Tuesday, May 25, 2010
क्या ग़लत है, क्या सही है?
क्या ग़लत है, क्या सही है दरअसल ये सवाल ही नहीं है। नज़र बदले तो अच्छा बदतर हो जाता है, बदतर कई बार बेहतर बन जाता है, दूध जब रूप बदले तो बनता दही है, दूध का रूप बदलना ग़लत है या दही का जमना सही है। क्या ग़लत है, क्या सही है दरअसल ये सवाल ही नहीं है।जगह बदले तो अक्सर बातें बदल जाती हैं लोग बदलते हैं, चाहतें बदल जाती हैं, कहीं दिन तो कहीं रातें बदल जाती हैं, क्या दिन का ढलना ग़लत है या रातों का आना सही है । क्या ग़लत है, क्या सही है दरअसल ये सवाल ही नहीं है।
Wednesday, April 28, 2010
एक सवाल
पंकज रामेन्दू
एक सवाल हर बार सोचता हूं कि जिंदगी जब एक रूपया हो जायेगी,तो बारह आने खर्च कर डालूंगा औऱ चाराने बचा लूंगा, कभी ज़रूरत पड़े,तो इन चारानों से बारानों का मज़ा ले सकूं,लेकिन जब भी वक्त की मुट्ठी खुलती है तो हथेली पर चाराने ही नज़र आते हैं पूरी जिंदगी चाराने को बाराने बनाने में होम हो जाती है, कई बार लगता है कि जब ये रुपया हो जायेगी तो क्या जिंदगी, जिंदगी रह जाएगी ?
एक सवाल हर बार सोचता हूं कि जिंदगी जब एक रूपया हो जायेगी,तो बारह आने खर्च कर डालूंगा औऱ चाराने बचा लूंगा, कभी ज़रूरत पड़े,तो इन चारानों से बारानों का मज़ा ले सकूं,लेकिन जब भी वक्त की मुट्ठी खुलती है तो हथेली पर चाराने ही नज़र आते हैं पूरी जिंदगी चाराने को बाराने बनाने में होम हो जाती है, कई बार लगता है कि जब ये रुपया हो जायेगी तो क्या जिंदगी, जिंदगी रह जाएगी ?
Saturday, April 17, 2010
जवान देश बूढ़े लोग

जवान देश बूढ़े लोग
-उन दोस्तों के लिए जो समय से पहले बूढ़े हो चले हैं ।
मेरे कुछ दोस्त हैं । पैदाईश की उम्र को पैमाना मानें तो माशाअल्लाह गबरू-जवान कहलाने लायक हैं । पर जवानी उन्ामें झलकती नहीं । जोश नहीं मारती । पतला वाला तीस के करीब पहुंच चुका है । मोटा दो साल पीछे है। ढलती शाम के साथ ही दोनों के कंधे झुक जाते हैं । चेहरे पर पीलापन हावी होने लगता है । बुझा-बुझा सा दिखता चेहरा चिल्ला चिल्ला कर बुढ़ापे से उनकी बढ़ती नजदीकी को बयान करते हैं ।
बात महज जवानी से दूर होते बॉडी-लैंग्वेज तक रूकी रहती तो खैर था । क्यां बताएं इन दिनों उनकी बातचीत का लहजा भी खतरनाक हो चला है । महज चार-पांच साल पुरानी नौकरी में पचास साल का अनुभव पा चुके इन दोस्तों के तर्क भी अजब गजब है । हर ओर छाई उदासी और खतरे को खुद से सबसे पहले जोड़ने लेत हैं । मुझे बहुत फिक्र है मेरे भाईयों । क्या होगा तुम दोनों का ।
उनको देख ऐसा लगता है जैसे छत के उपर मुंडेर पर काला लिहाफ ओढ़े खतरनाक बुढ़ापे का साया उन्हें लगातार पास बुला रहा है । झूलते चेहरों वाले, सफेद बालों और थकी हुई आंखों पर चश्मा लगाने वाला वह चेहरा डरा रहा है । और जवानी । जैसे दूर किसी छत पर खड़ी अलमस्त जवान औरत की तरह बन गई है। पास आने को तरसा रही है । लगातार बढ़ती दूरी का नशतर चुभा रही है ।
वैसे यह इन दो दोस्तों की बात नहीं है । ऑफिस में जुटे कामकाजी सहयोगियों पर भी ढलती हुई उम्र का असर दिखता नजर आ रहा है । मिला-जुलाकर एक बेचारगी सी झलकती है सबके चेहरे पर । लड़ने को कोई जज्बा नहीं बचा है किसी में । पैदा हो गए थें । सो किसी तरह समय काटने के लिए खा पका रहे हैं ।
सच कहूं तो गहरे अर्थों में यह मुल्क भी बूढ़ा हो चला है । समय से पहले रिटायरमेंट प्राप्त कर चुका बुजूआü मुल्क । विश्वास नहीं होता हो , अपने करीब मौजूद किसी छोटे बच्चे से सवाल पूछीए । जिंदगी और मौत के बारे में उसके विचार जानने की कोशिश कीजिए । उससे तीन गुणे ज्यादा उम्र का पढ़ा लिखा विदेशी भी उतना नहीं बता पाएगा । जितना हमारे देश का छोटा बच्चा जिंदगी और मौत के बारे में अधिकार भाव से बोलता नजर आएगा ।
आप शायद इसे संस्कारों की संज्ञा देंगे । पर मैं इसमें खो गए बचपन की बालपन को देखता हूं । खेलने कूदने की उम्र में ही गंभीर हो चला है । तत्व ज्ञान जैसी बातें करता है। और हम मुग्ध हैं । वाह! इट हैपेन्स ओनली इन इंडिया ।
मैने सुना था कि आबादी के उम्र के लिहाज से भारत एक युवा देश है । देश की साठ फीसदी आबादी जवान कहलाने लायक है । हां उम्र के पैमाने पर सही है । पर दिमागी तौर पर सब के सब मौत का इंतजार करती हुई एक बेचारी भीड़ से ज्यादा कुछ नहीं है । मामला चाहे कोई भी हो । कोई लहर पैदा नहीं होती । संसद में पैसे लेकर सरकार गिराने की बात हो । बंगलुरु या अहमदाबाद में बम Žलॉस्ट की बात हो । सड़क खराब हो जाने की बात हो । या सरेशाम किसी युवति की इज्जत के साथ होने वाले खिलवाड़ की बात हो । हम पर कोई असर नहीं पड़ता । जब तक हम सुरक्षित हैं । हमें परवाह ही नहीं । आखिर हम जवान जो ठहरे ! इंडिया इज यंग ! ! ! !
जानता हूं अभी भी यकिन नहीं आता होगा । मान ही नहीं सकते । विश्व गुरू रह चुके हैं हम । ऐसे कैसे मान लेंगे । मैंने कहा और मान लें । अरे मैं कौन हूं । एक छोटा प्रयोग करके देखीए । देश और दुनिया में जुड़ी बातों पर लोगों के विचार सुनिए । खाट पर पड़े चर चर करने वाले बुढ़ापा राग और निंदा रस में डूबी व्या�याओं के अलावा कुछ और नहीं दिखेगा । एक भी आदमी ऐसा नहीं दिखता या बोलता कि हम नया क्या कर सकते हैं। पता नहीं क्यों उम्र से जवान लोग भी जवानी की भाषा भूल गए हैंं ।
हर मोड़ पर । हर चेहरे पर एक लाचारी दिखती है । बस यूं ही घीसटते रहने की लाचारी । कोई रिस्क लेने को तैयार नहीं है । यही नहीं कोई आगे बढ़े तो एक दो नहीं चालीस लोग उसे रोकने को आगे आ जाते हैं । मां-बाप रोकते हैं । भाई बहन लगाम लगा देतेे हैं । दोस्त समाज सब जुट जाते हैं । अरे रोको इसे । यह पागल है जवानी की बात करता है । अरे कुछ नहीं होगा । बहुत आए और बहुत गए ।
बसों में सफर करते वक्त आस पास लोगों के चेहरे देखीएगा । एक बेचारगी सी दिखेगी । सबके चेहरे पर सम भाव बेचारगी । साथ साथ लटके रहने का भाव । उ�मीद बस दो ही है । किसी तरह पास वाली सीट पर बैठने का अवसर मिल जाए । या जल्दी बस स्टॉप आ जाए ।
बूढ़ा मुल्क और सोच भी क्या सकता है । मजेदार बात यह है कि लोग तर्क खोज लेते हैं । तर्क के रंग से बाल काले करने का प्रयास करते हैं । कहते हैं कि देखों जिंदगी ऐसे ही चलती है भाई । देखो बाल काले हैं हमारे । जवानी बची है यार । थोथे तर्क । पर कमजोर हाथों में भारी तलवार कितनी देर टिकती है । खुद ही सर या पांव पर दे मारते हैं हम सारे ।
अपने एक बुढ़ाते दोस्त के छोटे भाई की कहानी सुनाऊं आपको । जिंदगी और मौत के बारे में अधिकार भाव से बोलते नजर आते हैं । नौकरी जो करते हैं उसकी फिक्र कम है । जज्बा नहीं पेट भरने का रूटीन है । बेहतर तरीके से कैसे काम करते हैं यह पूछते ही चुप हो जाते हैं । पर जिंदगी और मौत पर चर्चा छेड़ीए कि उनका व्या�यान शुरू हो जाता है । मेरी एक महिला मित्र हैं। हां, वाकई हैं । उनकी छोटी बहन भी है । एक दिन शुरू हो गइंü । जिंदगी और जिंदगी के बाद की जिंदगी पर । उनकी रूचि देखकर मैं भी दंग रह गया । पूछा, जिंदगी को कौन सी दिशा देना चाहती है । बोलीं , होय वही जो राम रची राखा। अब ऐसे लोगों से हम जवानी की उ�मीद क्या करें । होय वहीं , जो राम रची राखा। हां अधूरा छोड़कर लिखना बंद कर रहा हूं । बाकी जल्द ही । किस्तों में । यहीं ।
Friday, February 27, 2009
Fucking Frustration
कहानी से पहले कुछ शब्द
मेरे बेहद करीबी दोस्त है
कई सालों से उनका अफेयर चल रहा है
जो अब टूटने की कगार पर है
उनकी जिंदगी में कई ऐसे मोड है
जो किसी मुम्बइया फिल्म के लिए धांसू मासाला साबित हो सकता है
खैर उनके लंबे जीवन के कुछ पलों से प्रेरित होकर और उसमें कुछ कल्पनाओं का घालमेल कर
मैंने यह कहानी लिखी है;
लिखना इसलिए जरूरी था कि
क्योंकि यही इस कहानी की नियती थी
बहरहाल
पेश है एक अजब कहानी
पहला प्रसंग
वह बंदा दिल्ली आया था । शायद 2000 की बात हो । कुछ सपनों के साथ और कुछ दोस्तों के कहने पर कहीं घर में महसूस होने वाली उब और बंदिशों से बचने के के लिए आया था। दिल्ली उम्र बीस बाईस के पास रही होगी। उसकी एक प्रेमिका थी।
जैसा उसने बताया। यहां दिल्ली में जीवन में सकून था। जल्द ही काॅलेज शुरू हो गया।काॅलेज में एक लडकी से मोहब्बत जैसी कुछ चीज हुई एक बार फिर दोस्तों के कहने पर प्रपोजल ठोका लडकी ने इंकार कर दिया । वह पैसे वाली लडकी थी। यह ग्रेट इंडियन मिडिल क्लास का बंदा था । वह सेंटी हो गया दोस्तों के साथ दारू पीकर भूलने की कोशिश करता था।समय गुजरता रहा जाॅब की जददोजहद पैसे घर से आने कम होने लगे थे। पिता जी कहना था कुछ टयूश्न वगैरह देखो घर की दिक्कतों को देखते हुए उसने नौकरी खोजना शुरू किया पढने में ठीक था एक नौकरी मिली शुरूआती दिनों में वह सारा ध्यान नौकरी पर देने लगा कुछ माह बीत गए उसे वहां एक लडकी दिखी
भोली सी
अपनी सी
उससे बात शुरू
हुई
कई बार दोनों ने
एक दूसरे की मदद की
अनजाने में
एक प्यारे से रिश्ते की
शुरूआत हो चुकी थी
दिन बीते
माह बीते
साल बीते
बंदे ने नौकरी छोड दी
दूसरी जगह नौकरी करने लगा
वह बहुत व्यस्त हो गया था
उसे काम के अलावा
किसी बात की फिक्र नहीं थी
खूब मेहनत करता था
तरक्की मिली
एक दिन जब वह कार्यालय
जा रहा था
तब
बस स्टाॅप पर
उसे वही पुराने आॅफिस वाली
लडकी दिखी
बाइक रोककर
वह उसके पास गया
दोनों में फोन नंबर
एक दूसरे को दिया
एक बार फिर
जिंदगी सुनहरी करवट लेने लगी
धीरे धीरे
बातचीत रंग लाने लगी
अब दोनों को
जब भी काम से फुसर्त मिलती
आपस में बतियाने में जुटे रहते
दिन बीते
माह बीते
कई बार मुलाकात हुई
कई रेस्टोरेट में
संगीतमय शामें
साथ गुजारी
मिलने की ललक बढी
और फिर
दोनों काम को
किनारे कर मिलने लगे
रिश्ते के भंवर कुछ गहरे हो चले थे
सब कुछ सुनहरा सुनहरा था
सपने जैसा सुनहरा
लडके के लिए
एक अच्छी नौकरी
एक अच्छी लडकी
लडकी के लिए
एक अच्छा साथी
एक नौकरी
दोनों
अपने
दोस्तों के बीच
एक दूसरे को प्रेमी प्रेमिका बताते
कुछ दिनों बाद
लडके ने उसे प्रपोज किया
कुछ नाज नखरे के बाद
लडकी मान गई
मगर
शादी के शत्र्त पर
रिश्तों का भंवर और तेज घूमने लगा था
अब दोनों एक दूसरे की फिक्र करने लगे
लडका खाना खाता है या नहीं
लडकी उसके लिए खाना
घर से बनाकर लाती
लडका
उसकी परवाह करता
उसे घर से
लाता और वापस घर ले जाता
इसी बीच
लडके के लडकी की जाॅब के बारे में पूछा
उसे कई दिक्कतों की बात कही
पहली बार
लडकी अपनी दिक्कतों का रोना रोती रहती थी
लडके की अपनी मुश्किलें थी
दोनों की दिक्कतों ने
एक दूसरे को करीब ला दिया
दोनों और करीब आए
एक दिन
किसी दुपहरी को
वह लडकी इसके घर पहुंची
वहां कोई नहीं था
दोनों के बीच
सेक्स हुआ
लडकी रोने लगी
लडके ने समझाया
लडकी का मन बहल गया
अब
यह दौर
अब हर
सप्ताह जारी रहने लगा
लडकी शादी की बात पर यकीन करती थी
लडका सपने देखता साथ जिंदगी के सपने
दोनों
हर सप्ताह मिलते
सेक्स करते
एक दूसरे के बारे में अच्छी अच्छी बाते करते
एक दूसरे के लिए ढेरो गिफट खरीदते
और काम में लगे रहते
इस बीच
सब अच्छा अच्छा होने लगा
सुनहरा
जिंदगी हसीन थी
प्यार से भरी हुई
सुनहरी
प्यारी
मगर
--
मुझे चेंज चाहिए
हां
उस दिन लडकी
यही तो कह रही थी
लडके से
मैं इस छोटी और घटीया सी
नौकरी से उब चुकी हूं
मुझे कुछ करना है
मुझे नाम , शोहरत और पैसा पाना है
लडके को भी यही चाहिए था
नाम ,शोहरत पैसा
पर लडकी के सपने ज्यादा बडे थे
उसे घर चाहिए था
कार चाहिए थी
नौकर चाहिए थे
अक्सर
इन बातों को सुनकर
लडके का मन उदास हो जाता
आखिरकार एक अच्छी नौकरी
उसने बदल दी
कुछ पैसों की खातीर उसने भी चेंज कर लिया
लडका नई जगह पर था
ज्यादा पैसे मिलते थे उसे
पैसों से वह अपनी
होने वाली बीबी के लिए
बहुत कुछ खरीदना था
वह उसके लिए घर खरीदना चाहता था
कार भी
नौकरी भी रखने की तमन्ना करता था
रोज रात को सपने में
वह इन चीजों का मालिक बन जाता
वह अक्सर
अपनी होने वाली बीबी को
इन सपनों की कहानी बताता
वह पैसे बचाने लगा था
लडका उसमें बीबी की खोज करता
लडकी उसमें पति को देखती थी
दोनों कुछ खोज रहे थे
मगर शायद
दोनों को कुछ मिल नहीं पा रहा था
इसी बीच लडकी के आॅफिस में
कुछ प्राब्लम हुई
लडके को बताया नहीं
खुद ही फेस करने की कोशिश की
कुछ दिनों बाद
लडके को बात पता चली
कि लडकी का बाॅस
उसका बाॅस उसे तंग करता था
हालांकि
लडकी की खुशकिस्मती देखीए
जल्द ही तंग करने वाला बाॅस बदल गया
नया बास आया
नई समस्याओं के साथ
अब
कुछ बेहतर होने की उम्मीद थी
मगर ऐसा नहीं हुआ
लडकी की स्थिति खराब होती चली गई
नए बास का एक विरोधी
पहले से कार्यालय में मौजूद था
वही लडकी की मदद के लिए आगे आया
लडकी ना नही कर सकी
अब आॅफिस में उस
लडकी की स्थिति बेहतर हो चली थी
जिसने उसकी मदद की थी
वह गुट प्रभावी होने लगा था
एक रात वापस घर जाने के लिए लडकी
बस स्टाॅप पर बस का इंतजार कर रही थी
मददगार बंदा
अपनी कार लेकर आया
लडकी ने ना नुकर की
फिर उसे बस में होने वाली दिक्कतों की याद आई
लडके जिस तरह से कुछ महसूस करने के चक्कर में रहते हैं
उसकी रूह कांप गई
वह झट से कार में बैठ गई
इस बीच
उसके प्रेमी का फोन आया
लडकी ने फोन नहीं उठाया
हालांकि
कुछ सोचकर
वह बीच रास्ते में ही उतर गई
रास्ते में मददगार बास ने
घरवालों के बारे में पूछा
कुछ दिन गुजर गए
लडकी का एक सहकर्मी कार्यालय में था
जिससे उसकी अच्छी बनती थी
दोनों एक दूसरे की मदद करते थे
रात को लडकी को घर जाना था
उसने अपने प्रेमी को फोन किया
बातों ही बातों में प्रेमी ने बताया कि
वह बिजी है
बातों ही बातों में
लडकी को कुछ याद आया
उसने अपने दोस्त को फोन किया
वह आया
उस दिन पहली बार
उसका दोस्त उसे बाइक के पीछे
बिठा कर घर छोड आया था
अब रोजाना उसे
कोई न कोई घर छोड देता
कोई नहीं मिलता तो
वह बस का प्रयोग करती
उधर लडका किसी काम से घर गया था
रोज बातचीत होती थी
कई बार कुछ अनबन सी हो जाती
मगर बातों ही बातों में सब सामान्य हो जाता
दोनों एक दूसरे से बंध चुके थे
मोहब्बत का बंधन मजबूत हो चला था
पर
हमेशा की तरह
नियति को
शायद इस बार भी
कुछ और
ही
मंजूर था
कयामत का दिन
हाल ही खरीदी गई
नई सूट पहनकर लडकी आफिस पहुंची थी
उसे लोग अच्छा बता रहे थे
केबिन के पास ही
मददगार बंदा उसे देख रहा था
उसने उसे बुलाया
उसकी तारीफ की
वह अच्छा काम करती है यह भी बताया
लडकी खुश होकर केबिन से निकल गई
दोपहर को लडकी कैंटीन में थी
अपने उसी सहकर्मी के साथ
मददगार बंदा पहुंचा
लडकी को बुलाया
लडके को हडकाया
बातों ही बातों में
किसी काम को जल्द
निपटाने को कहा
काम जारी था
तभी
लडकी को उसने बुलाया
बोला आज पार्टी है
तुम्हे चलना होगा
यहां बता दूं कि मददगार बंदा बीच बीच में
उसके काम पर निगाह रखता था;
अक्सर उसके घर तक छोड जाता था ;
उसकी बीबी थी ;
उससे बात भी कराई थी;
बच्चे भी थे
उनसे भी इस लडकी की बातचीत होती थी;
जी खोलकर
लडकी की मदद करता
लडकी
पार्टी में जाना नहीं चाह रही थी
मगर, वह मना नहीं कर पाई
कार पार्टी स्थल की ओर बढ चली
रास्ते में
बंदे को कुछ याद आया
बोला
अरे एक मिनट के लिए
घर चलना होगा
लडकी को कुछ शक हुआ
मददगार ने भांप लिया
कहा आप कार में बैठे रहना
मैं तुरंत लौअ आउंगा
मददगार का घर
एक महंगी लोकेलिटी पर था
लडकी सोच रही थी
मैं भी अपने
प्रेमी से कहूंगी
कुछ ऐसा ही मकान बनाने को
मैं भी तो अच्छी जिंदगी चाहती हूं
कार में सोचते सोचते
पांच मिनट गुजर चुके थे
मददगार वापस नहीं लौट रहा था
इस बीच
इसके प्रेमी का फोन आया
इसके कहा
आॅफिस में हूं
बाद मंे बात करता हूं
प्रेमी की बातों का उत्साह ठंडा पड गया था
दरअसल
वह घरवालों को रजामंद कर चुका था
उसके लिए कीमती तोहफे लाया था
मगर
वह बोल नहीं पाया
इधर कार में पांच और मिनट गुजर चुके थे
वह कार से उतरी
कुछ सोचती हुई
घर के अंदर दाखिल हुई
अंदर से अचानक आवाज आई
बस हो गया
आ रहा हूं
एक मिनट बाद
दोबारा आवाज आई
अंदर आ जाओ
घबराओ नहीं
पानी पी लो
लडकी ्िरफज से पानी
निकालकर पी रही थी
सामने से उसका मददगार बास
सज संवर कर आ चुका था
सामने दिखते ही उसने कहा
अब तुम इतनी अच्छी लग रही हो तो
मुझे भी अच्छा डेस पहनना पडा
लडकी खुश हो गई
इस बीच दोनों बाहर आ गए
मददगार का मोबाइल अंदर रह गया था
उसने दोबारा दरवाजा खोला
मददगार शख्स ने लडकी की ओर देखा
आंखों में कुछ बात थी
दोनों घर के अंदर
कमरे में बैठ गए
आफिस की दिक्कतों से बात शुरू हुई
लडकी को सपोर्ट करने की बात बताई गई
बातों ही बातों में मददगार
उसके पास आ गया था
लडकी को पता चलने से पहले
उसका हाथ मददगार पकड चुका था
लडकी बिदक गई
उसने विरोध किया
मददगार ने हाथ नहीं छोडा
लडकी रोने लगी
मददगार अडा रहा
वह उसके कपडे उतार रहा था
कमरे में वह इधर उधर
भागती रही
मगर उसके कदम
रूक गए
लडकी रोती जा रही थी
उसने मददगार को एक जोरदार चांटा
मारा विरोध किया
सर यह गलत है सर
ऐसा मैं नहीं कर सकती
प्लीज
मैं मर जाउंगी
मगर पता
नहीं क्यों
उस दिन लडकी
ज्यादा देर तक
मना नहीं कर पाई
नए कपडे
उतार दिए गए
मददगार ने सेक्स किया
लडकी ने जिस्म को झेला
लडकी देर तक राती रही
जमाने की तस्वीर उसके सामने थी
गरीब मां बाप
प्रेमी, दोस्त
बेदर्द जमाने में वह लुट चुकी थी
वह मरना चाह रही थी
मददगार ने समझाया
एक घंटे बाद
दोनों आॅफिस पहुंचे
उस रात को
लडकी सो नहीं पाई
मददगार
उसके साथ सपने में दुराचार करता रहा
सुबह बोझिल सी
कुछ खोई सी
रूआंसी होकर
आॅफिस
पहुंची
अगले दिन
मगर यह क्या
लडकी की पूरे आॅफिस में चर्चा थी
मददगार ने उसकी
खबर की खूब तारीफ की थी
लडकी मीडिया में थी
दो दिनों बाद
वह प्राइम टाइम की एक्सक्लूसीव खबर कर रही थी
जल्द ही
उसका प्रमोशन हो गया
जिस्म झेलना उसकी मजबूरी बन गई थी
वह सिगरेट और शराब पीने लगी थी
खोई खोई सी रहती थी
मददगार ने उसकी हर इच्छा पूरी की थी
बगैर कुछ कहे और
बहुत कुछ पाकर
उसे पैसे चाहिए थे, उसे कई प्रमोशन मिले
नाम चाहिए था, प्राइम टाइम में मौका दिया गया
शोहरत चाहिए थी, मशहूर एंकर बन चुकी थी;
उधर लडके से वह आम दिनों की तरह मिलती रही
वह उससे आज भी उतनी ही मोहब्बत करती थी
बेईंतहा मोहब्बत
अपने जानू के लिए वह कई सामान खरीदती
लडका खुश हो जाता
दोनों साथ बिताते
उस दौरान वह लडकी
नार्मल दिखने का प्रयास करती
इस बातों और मजबूरियों से अनजान
लडके को पता नहीं चला कि
उसक दुनिया कितनी बदल चुकी थी
एक बार फिर
वक्त ने करवट ली
कुछ दिनों बाद
चैनल में
मददगार की स्थिति
कमजोर होती गई
राजनीति का दांव इस बार उल्टा पडा था
वह नौकरी छोडकर चला गया था
लडकी
अकेली रह गई थी
रात को बहुत दिनों बाद
उसे बस में जाने की जरूरत पडी थी
उसने पुराने दोस्त को फोन किया
बाइक वाले सहकर्मी आ गया
मगर
दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई
घर पर
उस रात
लडकी को नींद नहीं आई
करवट बदलती रही
अपने प्रेमी के बारे में सोचती रही
उसे याद आया
बीते कई माह से
उसे नींद आनी कम हो गई थी
नींद की गोली
उसकी जरूरत बन चली थी
इधर घरवाले
लडकी से कुछ
और पैसों की डिमांड करने लगे थे
रात को ऐसे लगा
उसे लगा
उसका प्रेमी
उससे दूर होने लगा था
वह कितनी कोशिश कर रही थी
मगर वह दूर जा रहा था
सपने में अब
मोहब्बत के बजाए
दिखने लगी थी दूरियां
छुटृटी वाले दिन
कई माह बाद
दोपहर को
दोनों पुराने प्रेमी
दोबारा मिले
दोनों ने शिकायत की
अब तुम पहले जैसे नहीं रहे
उस दिन भी
लडकी के फोन पर
आॅफिस से फोन आते रहे
इधर शाम को जब
दोनों एक दूसरे में खोने लगे थे
तभी
उन निजी क्षणों में
लडकी का फोन
रिंग करने लगा
सेक्स छोडकर
वह फोन पर बात करने लगी
बात जब थोडी लंबी हो गई तो
लडके को सहन नहीं हुआ
वह बाथरूम चला गया
वापस कमरे में दाखिल
होते वक्त लडकी ने पूछा
कहां चले गए थे
तुम तो
कुछ कर ही
नहीं सकते
बात कहीं चुभी थी
खैर
दोनों में
बातचीत हुई
दोबारा सेक्स भी हुआ
साथ मरने जीने
की कसमें
खाकर दोनों विदा हुए
इधर
लडके की नौकरी पर खतरा मंडराने लगा
उसके यहां माहौल ठीक नहीं था
मंदी की
ताजतरीन मार
सब पर पडने लगी थी
इस बीच
लडके ने
नौकरी के लिए
उसी मददगार को फोन किया
फोन पर मददगार ने उसके काम की सराहना की
पर नौकरी देने से इंकार कर दिया
लडकी को फोन कर वह कुछ
बताने वाला ही था कि
लडकी का फोन आया
मददगार शख्स की बात बताते हुए
लडकी बोल रही थी
सर ने मुझे नई नौकरी दे दी है
ओफ वह कितने अच्छे है
मैं तुम्हारे लिए भी
उनसे बात करूं
क्या
लडके ने मना करते हुए
फोन काट दिया
आज
वह कुछ हार गया था
पुरानी उस दिन वाली बात याद आई
सेक्स के दौरान
फोन आने की घटना
कमाल है लडकी फोन
उस वक्त वह फोन कैसे
उठा सकती थी
वह कुछ उलझन में था
सामने दीवार थी
हाथों में फोन था
अचानक आए
गुस्से ने फोन और दीवार का
तालमेल करा दिया
फोन जमीन पर टुकडो टुकडो में पडा था
-
फिर नई नौकरी
लडकी को नई नौकरी मिल चुकी थी
वह खुश थी
उसे प्रेमी से ज्यादा पैसे मिलते थे
अंदर ही अंदर
उसे इस बात का गहरा सकून मिल रहा था
उधर दोनों की बातचीत अब
आफिस खबर और पैसे को
लेकर ही होती थी
शादी और कसमें भी
इसका हिस्सा हुआ करती थी
मगर कभी कभी
अब दोनों नए तल पर थे
इस बार लडकी उंचे तल पर थी
उसके पास अच्छी नौकरी और पैसा था
इस बीच
मददगार ने एक और दांव खेला
लडकी को बुलाया
बोला यार
हमारे
यहां प्राइम टाइम में लिए स्लाॅट खाली है
लडकी ईशारा समझ चुकी थी
उसके मुंह से गालियां निकल रही थी
लडकी ने गाली देते हुए सिगरेट सुलगाया
कुछ सोचने के बाद
वह राजी थी
मगर दिक्कत कुछ और थी
प्राइम टाइम का प्रोडयूसर कोई और था
सीधे कहे तो
इस लडकी को
उसे खुश करना था
हर तरह से
वह इसके लिए तैयार नहीं थी
मददगार बोलता रहा
वह सुनती रही
सिगरेट को जमीन पर फेंकते हुए बोली
कहां जाना होगा
अगली सुबह
वह
प्रोडयूसर के घर पर थी
उस काले मोटे को देखकर
वह कांप गई
मोटा सब कुछ एक बार में ही पाना
चाहता था
मोटा उसके सामने अपना नंगा जिस्म लेकर
खडा था
लडकी ने मुंह बंद किया
आंखों से आंसू आ गए
वह उसे झेलती रही
मोटा उसे नोंचता खसोटता रहा
लौटते वक्त
कार में बैठी
लडकी सोच रही थी
राक्षस साला
आगे तो देखा भी नहीं
सिर्फ
पिछे ही
खैर
जल्द ही
उस चैनल में
प्राइम टाइम का शो
चलने लगा था
लडकी स्टाॅर बन चुकी थी
इधर लडका भी नई नौकरी तलाश चुका था
उसे बेहतर पैसे मिलने लगे थे
अपनी नौकरी से खुश था
शादी करना चाहता था
रोज टीवी पर होने वाली बीबी को देखता था
अब तो उसके
घरवाले भी देखते थे
वह फोन करता
तो वह बिजी रहती
सुबह से शाम तक
बिजी
रात को भी बिजी
कुछ टूट रहा था
दोनों के बीच
शायद
नीले भंवर का रंग हल्का हो चला था
प्रेम का प्रवाह मंद पडने लगा था
दोनों
शादी के फैसले के बारे में
दोबारा सोचने लगे थे
बडे दिनों बाद
उस रात
लडक ने शराब पी
खूब पी
अब वह रोज
शराब पीता था
लडकी के बारे में सोचता था
उसके सपने का क्या होगा
उधर
लडकी के नए चैनल में
प्रोडयूसर को तीन माह बीत चुके थे
अब प्रोडयूसर भी तंग आ चुका था
रोजाना एक ही जिस्म से तंग आ चुका था
मददगार का फोन आया लडकी के पास
बोला यार तुम कुछ दिनों के लिए छुटटी ले लो
लडकी समझ नहीं पाई
पर राजी हो गई
उसे शिमला जाने के पैसे दिए गए
मददगार से साथ जाने से इंकार कर दिया
काला प्रोडयूसर जा नहीं रहा था
अब उसने प्रेमी को फोन किया
दोनों शिमला गए
साथ
मददगार के पैसे पर
शिमला का मजा
रात को जब दोनों
बिस्तर पर थे
लडकी उसे शराबी हो जाने पर भला बुरा बोल रही थी
लडके के सामने आज उसने पहली बार शराब पी थी
दोनांे साथ साथ शराब पी रहे थे
सामने टीवी आॅन था
तभी उसके चैनल पर प्राइम टाइम का स्लग दिखा
सामने एक
नई खुबसूरत लडकी दिखी
अरे
लडकी चिल्लाई
यह कैसे हो सकता है
उसने सीधे प्रोडयूसर को फोन किया
प्रोडयूसर का फोन बिजी था
मददगार को फोन किया
इधर लडका हैरान था
फाॅरप्ले के बाद सेक्स से ऐन पहले
लडकी का फोन पर बिजी हो जाना
परेशान हो जाना
उसे कुछ समझ में नहीं आया
वह चिल्लाया
उधर लडकी फोन पर चिल्ला रही थी
टीवी पर
वह नई वाली एंकर
चिल्ला रही थी
शोर हर ओर शोर
लडकी बोली
मददगार यह क्या है
मददगार ने उसे समझाने की कोशिश की
उसने साफ कहा
तुम्हारी टीआरपी डाउन हो रही थी
अब ज्यादा टीआरपी चाहिए
इसलिए नई लडकी लाई गई थी
लडकी ने फोन फेंक दिया
नंगे बदन ही खिडकी के पास पहुंच गई
कुछ घंटे बाद
वहां सन्नाटा था
रात के उस सन्नाटे में
कई गुमनाम चीजें थी
किसी के रोने की आवाज थी
एक घुटन
कई सवाल
हवा में
तैर रहे थे
शराब की बदबू
(अगर आप चाहें तो खुशबू भी मान सकते हैं) थी
लडकी उल्टी पडी थी
नींद शराब और frustration
लडके की नींद टूटी
उसने
सामने पडा जिस्म देखा
उसका
frustration
सामने आ गया
वह कुत्तों की तरह
उस पर टूट पडा
वह प्यासा था
सब कुछ
खा जाना चाहता था
एक ही बार में
समूचा
वह पागल हो गया थ
अंधा पागल
कई दिनों का frustration
सामने आ गया था
लडकी चिल्लाइ
लडकी र्का
frustration
बाहन निकला
वह गुस्से में थी
लाल
चिखती हुई बोली
तू भी मेरी मारना चाहता है
ले मार ले
घुसा दे अंदर
बुझा ले प्यास
frustration
लडके ने वैसा ही किया
मगर दूसरे ही सेकेंड ठिठका
उसने कुछ सुना था
तू भी मेरी मारना चाहता है
हां यही शब्द थे
उसकी होने वाली बीबी के
वह
रूक गया जोश ठंडा पड गया
उसने पूछा
तू भी का मतलब क्या है
अरे यार कुछ नहीं
लडकी ने कहा
वह डर गई
लाल चेहरा
फक पड गया
मैं सपना देख रही थी
मुझे लगा ..
कोई मेरे साथ
जबरदस्ती कर रहा है
..
लडका समझ चुका था
frustration
लडकी भी समझा चुकी थी
..
सुबह
सामान पैक था
दोनों ने
टूर कैंसल कर दिया
बताते हैं
कई दिनों तक
दोनों में बात नहंी हुई
फोन पर घंटों चिपके रहने वाले
एक
मिस काॅल करने और पाने को तरस गए
एसएमभी नहीं भेजा
इधर
चैनल में लडकी की टीआरपी डाउन हो चली थी
लडका काम और उस लडकी के बीच उलझ चला था
तभी
नियती का एक और पासा
खतरनाक खेल
एक ब्रेकिंग न्यूज
लडके को मिली
अरे यार
उस चैनल में
एक प्राइम टाइम एंकर थी
अभी तीन माह पहले आई थी
जिसकी चर्चा है बहुत आज कल
हां
याद है ना
शायद
तू तो उसे जानता है
ना अरे नहंी
क्या हुआ ?
उसका एमएमएस आया है नया
वह देखना नहीं चाहता था
पर दोस्त को मना नहीं किया
ब्लूटूथ से
एमएमएस लेते वक्त
लडके को
पसीने आ गए
प्राडयूसर ने
उसके साथ गुजारे निजी
वक्तों का
एमएमएस बनाया था
बेहद अश्लील
"tu भी मेरी मारना चाहता है"
उसे बहुत कुछ
समझ आ चुका था
रात
उसे नींद नहीं आई
तनाव में उसने गोलियां खा ली
20 नींद की गोलियां
लडकी भी बेहद तनाव में थी
तनाव कम
पछतावा ज्यादा
बेचारगी भी छुपी हुई
सामने
गरीब मां बाप
और
दूर जाते
प्रेमी की तस्वरी
सी चल रही थी
बेददर्ज जमाने की रूखी तस्वीर
वह प्रोडयूसर का
खून करना चाहती थी
मददगार को मौत देना चाहती थी
मगर वह
ऐसा कर नहीं पाई
शराब पीकर उसने
कुछ गोलियां खा ली
नियती देखिए
दोनों एक ही अस्पताल में लाए गए थे
दोनों ने ही नींद की गोलियां खाई थी
दोनों ने शराब भी पी थी
उस अंधेरी और सर्द रात को
सरकारी अस्पताल के डाॅक्टर
उन दोनों को बचा नहीं पाए
मौती जीत गई
जिंदगी हार गई
उन दोनों का
अंतिम संस्कार
अलग अलग हुआ
दोनों की रूह
उनके जिस्म से निकल
कर आमने सामने बैठ गई
उनमें भी
बात तक नहीं हुई
कोई संवाद नहीं हुआ
एक सन्नाटा सा छा गया
मगर
दोनों
किस वजह से मरे
इसका उत्तर आपको देना होगा
शुक्रिया
अभय
मेरे बेहद करीबी दोस्त है
कई सालों से उनका अफेयर चल रहा है
जो अब टूटने की कगार पर है
उनकी जिंदगी में कई ऐसे मोड है
जो किसी मुम्बइया फिल्म के लिए धांसू मासाला साबित हो सकता है
खैर उनके लंबे जीवन के कुछ पलों से प्रेरित होकर और उसमें कुछ कल्पनाओं का घालमेल कर
मैंने यह कहानी लिखी है;
लिखना इसलिए जरूरी था कि
क्योंकि यही इस कहानी की नियती थी
बहरहाल
पेश है एक अजब कहानी
पहला प्रसंग
वह बंदा दिल्ली आया था । शायद 2000 की बात हो । कुछ सपनों के साथ और कुछ दोस्तों के कहने पर कहीं घर में महसूस होने वाली उब और बंदिशों से बचने के के लिए आया था। दिल्ली उम्र बीस बाईस के पास रही होगी। उसकी एक प्रेमिका थी।
जैसा उसने बताया। यहां दिल्ली में जीवन में सकून था। जल्द ही काॅलेज शुरू हो गया।काॅलेज में एक लडकी से मोहब्बत जैसी कुछ चीज हुई एक बार फिर दोस्तों के कहने पर प्रपोजल ठोका लडकी ने इंकार कर दिया । वह पैसे वाली लडकी थी। यह ग्रेट इंडियन मिडिल क्लास का बंदा था । वह सेंटी हो गया दोस्तों के साथ दारू पीकर भूलने की कोशिश करता था।समय गुजरता रहा जाॅब की जददोजहद पैसे घर से आने कम होने लगे थे। पिता जी कहना था कुछ टयूश्न वगैरह देखो घर की दिक्कतों को देखते हुए उसने नौकरी खोजना शुरू किया पढने में ठीक था एक नौकरी मिली शुरूआती दिनों में वह सारा ध्यान नौकरी पर देने लगा कुछ माह बीत गए उसे वहां एक लडकी दिखी
भोली सी
अपनी सी
उससे बात शुरू
हुई
कई बार दोनों ने
एक दूसरे की मदद की
अनजाने में
एक प्यारे से रिश्ते की
शुरूआत हो चुकी थी
दिन बीते
माह बीते
साल बीते
बंदे ने नौकरी छोड दी
दूसरी जगह नौकरी करने लगा
वह बहुत व्यस्त हो गया था
उसे काम के अलावा
किसी बात की फिक्र नहीं थी
खूब मेहनत करता था
तरक्की मिली
एक दिन जब वह कार्यालय
जा रहा था
तब
बस स्टाॅप पर
उसे वही पुराने आॅफिस वाली
लडकी दिखी
बाइक रोककर
वह उसके पास गया
दोनों में फोन नंबर
एक दूसरे को दिया
एक बार फिर
जिंदगी सुनहरी करवट लेने लगी
धीरे धीरे
बातचीत रंग लाने लगी
अब दोनों को
जब भी काम से फुसर्त मिलती
आपस में बतियाने में जुटे रहते
दिन बीते
माह बीते
कई बार मुलाकात हुई
कई रेस्टोरेट में
संगीतमय शामें
साथ गुजारी
मिलने की ललक बढी
और फिर
दोनों काम को
किनारे कर मिलने लगे
रिश्ते के भंवर कुछ गहरे हो चले थे
सब कुछ सुनहरा सुनहरा था
सपने जैसा सुनहरा
लडके के लिए
एक अच्छी नौकरी
एक अच्छी लडकी
लडकी के लिए
एक अच्छा साथी
एक नौकरी
दोनों
अपने
दोस्तों के बीच
एक दूसरे को प्रेमी प्रेमिका बताते
कुछ दिनों बाद
लडके ने उसे प्रपोज किया
कुछ नाज नखरे के बाद
लडकी मान गई
मगर
शादी के शत्र्त पर
रिश्तों का भंवर और तेज घूमने लगा था
अब दोनों एक दूसरे की फिक्र करने लगे
लडका खाना खाता है या नहीं
लडकी उसके लिए खाना
घर से बनाकर लाती
लडका
उसकी परवाह करता
उसे घर से
लाता और वापस घर ले जाता
इसी बीच
लडके के लडकी की जाॅब के बारे में पूछा
उसे कई दिक्कतों की बात कही
पहली बार
लडकी अपनी दिक्कतों का रोना रोती रहती थी
लडके की अपनी मुश्किलें थी
दोनों की दिक्कतों ने
एक दूसरे को करीब ला दिया
दोनों और करीब आए
एक दिन
किसी दुपहरी को
वह लडकी इसके घर पहुंची
वहां कोई नहीं था
दोनों के बीच
सेक्स हुआ
लडकी रोने लगी
लडके ने समझाया
लडकी का मन बहल गया
अब
यह दौर
अब हर
सप्ताह जारी रहने लगा
लडकी शादी की बात पर यकीन करती थी
लडका सपने देखता साथ जिंदगी के सपने
दोनों
हर सप्ताह मिलते
सेक्स करते
एक दूसरे के बारे में अच्छी अच्छी बाते करते
एक दूसरे के लिए ढेरो गिफट खरीदते
और काम में लगे रहते
इस बीच
सब अच्छा अच्छा होने लगा
सुनहरा
जिंदगी हसीन थी
प्यार से भरी हुई
सुनहरी
प्यारी
मगर
--
मुझे चेंज चाहिए
हां
उस दिन लडकी
यही तो कह रही थी
लडके से
मैं इस छोटी और घटीया सी
नौकरी से उब चुकी हूं
मुझे कुछ करना है
मुझे नाम , शोहरत और पैसा पाना है
लडके को भी यही चाहिए था
नाम ,शोहरत पैसा
पर लडकी के सपने ज्यादा बडे थे
उसे घर चाहिए था
कार चाहिए थी
नौकर चाहिए थे
अक्सर
इन बातों को सुनकर
लडके का मन उदास हो जाता
आखिरकार एक अच्छी नौकरी
उसने बदल दी
कुछ पैसों की खातीर उसने भी चेंज कर लिया
लडका नई जगह पर था
ज्यादा पैसे मिलते थे उसे
पैसों से वह अपनी
होने वाली बीबी के लिए
बहुत कुछ खरीदना था
वह उसके लिए घर खरीदना चाहता था
कार भी
नौकरी भी रखने की तमन्ना करता था
रोज रात को सपने में
वह इन चीजों का मालिक बन जाता
वह अक्सर
अपनी होने वाली बीबी को
इन सपनों की कहानी बताता
वह पैसे बचाने लगा था
लडका उसमें बीबी की खोज करता
लडकी उसमें पति को देखती थी
दोनों कुछ खोज रहे थे
मगर शायद
दोनों को कुछ मिल नहीं पा रहा था
इसी बीच लडकी के आॅफिस में
कुछ प्राब्लम हुई
लडके को बताया नहीं
खुद ही फेस करने की कोशिश की
कुछ दिनों बाद
लडके को बात पता चली
कि लडकी का बाॅस
उसका बाॅस उसे तंग करता था
हालांकि
लडकी की खुशकिस्मती देखीए
जल्द ही तंग करने वाला बाॅस बदल गया
नया बास आया
नई समस्याओं के साथ
अब
कुछ बेहतर होने की उम्मीद थी
मगर ऐसा नहीं हुआ
लडकी की स्थिति खराब होती चली गई
नए बास का एक विरोधी
पहले से कार्यालय में मौजूद था
वही लडकी की मदद के लिए आगे आया
लडकी ना नही कर सकी
अब आॅफिस में उस
लडकी की स्थिति बेहतर हो चली थी
जिसने उसकी मदद की थी
वह गुट प्रभावी होने लगा था
एक रात वापस घर जाने के लिए लडकी
बस स्टाॅप पर बस का इंतजार कर रही थी
मददगार बंदा
अपनी कार लेकर आया
लडकी ने ना नुकर की
फिर उसे बस में होने वाली दिक्कतों की याद आई
लडके जिस तरह से कुछ महसूस करने के चक्कर में रहते हैं
उसकी रूह कांप गई
वह झट से कार में बैठ गई
इस बीच
उसके प्रेमी का फोन आया
लडकी ने फोन नहीं उठाया
हालांकि
कुछ सोचकर
वह बीच रास्ते में ही उतर गई
रास्ते में मददगार बास ने
घरवालों के बारे में पूछा
कुछ दिन गुजर गए
लडकी का एक सहकर्मी कार्यालय में था
जिससे उसकी अच्छी बनती थी
दोनों एक दूसरे की मदद करते थे
रात को लडकी को घर जाना था
उसने अपने प्रेमी को फोन किया
बातों ही बातों में प्रेमी ने बताया कि
वह बिजी है
बातों ही बातों में
लडकी को कुछ याद आया
उसने अपने दोस्त को फोन किया
वह आया
उस दिन पहली बार
उसका दोस्त उसे बाइक के पीछे
बिठा कर घर छोड आया था
अब रोजाना उसे
कोई न कोई घर छोड देता
कोई नहीं मिलता तो
वह बस का प्रयोग करती
उधर लडका किसी काम से घर गया था
रोज बातचीत होती थी
कई बार कुछ अनबन सी हो जाती
मगर बातों ही बातों में सब सामान्य हो जाता
दोनों एक दूसरे से बंध चुके थे
मोहब्बत का बंधन मजबूत हो चला था
पर
हमेशा की तरह
नियति को
शायद इस बार भी
कुछ और
ही
मंजूर था
कयामत का दिन
हाल ही खरीदी गई
नई सूट पहनकर लडकी आफिस पहुंची थी
उसे लोग अच्छा बता रहे थे
केबिन के पास ही
मददगार बंदा उसे देख रहा था
उसने उसे बुलाया
उसकी तारीफ की
वह अच्छा काम करती है यह भी बताया
लडकी खुश होकर केबिन से निकल गई
दोपहर को लडकी कैंटीन में थी
अपने उसी सहकर्मी के साथ
मददगार बंदा पहुंचा
लडकी को बुलाया
लडके को हडकाया
बातों ही बातों में
किसी काम को जल्द
निपटाने को कहा
काम जारी था
तभी
लडकी को उसने बुलाया
बोला आज पार्टी है
तुम्हे चलना होगा
यहां बता दूं कि मददगार बंदा बीच बीच में
उसके काम पर निगाह रखता था;
अक्सर उसके घर तक छोड जाता था ;
उसकी बीबी थी ;
उससे बात भी कराई थी;
बच्चे भी थे
उनसे भी इस लडकी की बातचीत होती थी;
जी खोलकर
लडकी की मदद करता
लडकी
पार्टी में जाना नहीं चाह रही थी
मगर, वह मना नहीं कर पाई
कार पार्टी स्थल की ओर बढ चली
रास्ते में
बंदे को कुछ याद आया
बोला
अरे एक मिनट के लिए
घर चलना होगा
लडकी को कुछ शक हुआ
मददगार ने भांप लिया
कहा आप कार में बैठे रहना
मैं तुरंत लौअ आउंगा
मददगार का घर
एक महंगी लोकेलिटी पर था
लडकी सोच रही थी
मैं भी अपने
प्रेमी से कहूंगी
कुछ ऐसा ही मकान बनाने को
मैं भी तो अच्छी जिंदगी चाहती हूं
कार में सोचते सोचते
पांच मिनट गुजर चुके थे
मददगार वापस नहीं लौट रहा था
इस बीच
इसके प्रेमी का फोन आया
इसके कहा
आॅफिस में हूं
बाद मंे बात करता हूं
प्रेमी की बातों का उत्साह ठंडा पड गया था
दरअसल
वह घरवालों को रजामंद कर चुका था
उसके लिए कीमती तोहफे लाया था
मगर
वह बोल नहीं पाया
इधर कार में पांच और मिनट गुजर चुके थे
वह कार से उतरी
कुछ सोचती हुई
घर के अंदर दाखिल हुई
अंदर से अचानक आवाज आई
बस हो गया
आ रहा हूं
एक मिनट बाद
दोबारा आवाज आई
अंदर आ जाओ
घबराओ नहीं
पानी पी लो
लडकी ्िरफज से पानी
निकालकर पी रही थी
सामने से उसका मददगार बास
सज संवर कर आ चुका था
सामने दिखते ही उसने कहा
अब तुम इतनी अच्छी लग रही हो तो
मुझे भी अच्छा डेस पहनना पडा
लडकी खुश हो गई
इस बीच दोनों बाहर आ गए
मददगार का मोबाइल अंदर रह गया था
उसने दोबारा दरवाजा खोला
मददगार शख्स ने लडकी की ओर देखा
आंखों में कुछ बात थी
दोनों घर के अंदर
कमरे में बैठ गए
आफिस की दिक्कतों से बात शुरू हुई
लडकी को सपोर्ट करने की बात बताई गई
बातों ही बातों में मददगार
उसके पास आ गया था
लडकी को पता चलने से पहले
उसका हाथ मददगार पकड चुका था
लडकी बिदक गई
उसने विरोध किया
मददगार ने हाथ नहीं छोडा
लडकी रोने लगी
मददगार अडा रहा
वह उसके कपडे उतार रहा था
कमरे में वह इधर उधर
भागती रही
मगर उसके कदम
रूक गए
लडकी रोती जा रही थी
उसने मददगार को एक जोरदार चांटा
मारा विरोध किया
सर यह गलत है सर
ऐसा मैं नहीं कर सकती
प्लीज
मैं मर जाउंगी
मगर पता
नहीं क्यों
उस दिन लडकी
ज्यादा देर तक
मना नहीं कर पाई
नए कपडे
उतार दिए गए
मददगार ने सेक्स किया
लडकी ने जिस्म को झेला
लडकी देर तक राती रही
जमाने की तस्वीर उसके सामने थी
गरीब मां बाप
प्रेमी, दोस्त
बेदर्द जमाने में वह लुट चुकी थी
वह मरना चाह रही थी
मददगार ने समझाया
एक घंटे बाद
दोनों आॅफिस पहुंचे
उस रात को
लडकी सो नहीं पाई
मददगार
उसके साथ सपने में दुराचार करता रहा
सुबह बोझिल सी
कुछ खोई सी
रूआंसी होकर
आॅफिस
पहुंची
अगले दिन
मगर यह क्या
लडकी की पूरे आॅफिस में चर्चा थी
मददगार ने उसकी
खबर की खूब तारीफ की थी
लडकी मीडिया में थी
दो दिनों बाद
वह प्राइम टाइम की एक्सक्लूसीव खबर कर रही थी
जल्द ही
उसका प्रमोशन हो गया
जिस्म झेलना उसकी मजबूरी बन गई थी
वह सिगरेट और शराब पीने लगी थी
खोई खोई सी रहती थी
मददगार ने उसकी हर इच्छा पूरी की थी
बगैर कुछ कहे और
बहुत कुछ पाकर
उसे पैसे चाहिए थे, उसे कई प्रमोशन मिले
नाम चाहिए था, प्राइम टाइम में मौका दिया गया
शोहरत चाहिए थी, मशहूर एंकर बन चुकी थी;
उधर लडके से वह आम दिनों की तरह मिलती रही
वह उससे आज भी उतनी ही मोहब्बत करती थी
बेईंतहा मोहब्बत
अपने जानू के लिए वह कई सामान खरीदती
लडका खुश हो जाता
दोनों साथ बिताते
उस दौरान वह लडकी
नार्मल दिखने का प्रयास करती
इस बातों और मजबूरियों से अनजान
लडके को पता नहीं चला कि
उसक दुनिया कितनी बदल चुकी थी
एक बार फिर
वक्त ने करवट ली
कुछ दिनों बाद
चैनल में
मददगार की स्थिति
कमजोर होती गई
राजनीति का दांव इस बार उल्टा पडा था
वह नौकरी छोडकर चला गया था
लडकी
अकेली रह गई थी
रात को बहुत दिनों बाद
उसे बस में जाने की जरूरत पडी थी
उसने पुराने दोस्त को फोन किया
बाइक वाले सहकर्मी आ गया
मगर
दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई
घर पर
उस रात
लडकी को नींद नहीं आई
करवट बदलती रही
अपने प्रेमी के बारे में सोचती रही
उसे याद आया
बीते कई माह से
उसे नींद आनी कम हो गई थी
नींद की गोली
उसकी जरूरत बन चली थी
इधर घरवाले
लडकी से कुछ
और पैसों की डिमांड करने लगे थे
रात को ऐसे लगा
उसे लगा
उसका प्रेमी
उससे दूर होने लगा था
वह कितनी कोशिश कर रही थी
मगर वह दूर जा रहा था
सपने में अब
मोहब्बत के बजाए
दिखने लगी थी दूरियां
छुटृटी वाले दिन
कई माह बाद
दोपहर को
दोनों पुराने प्रेमी
दोबारा मिले
दोनों ने शिकायत की
अब तुम पहले जैसे नहीं रहे
उस दिन भी
लडकी के फोन पर
आॅफिस से फोन आते रहे
इधर शाम को जब
दोनों एक दूसरे में खोने लगे थे
तभी
उन निजी क्षणों में
लडकी का फोन
रिंग करने लगा
सेक्स छोडकर
वह फोन पर बात करने लगी
बात जब थोडी लंबी हो गई तो
लडके को सहन नहीं हुआ
वह बाथरूम चला गया
वापस कमरे में दाखिल
होते वक्त लडकी ने पूछा
कहां चले गए थे
तुम तो
कुछ कर ही
नहीं सकते
बात कहीं चुभी थी
खैर
दोनों में
बातचीत हुई
दोबारा सेक्स भी हुआ
साथ मरने जीने
की कसमें
खाकर दोनों विदा हुए
इधर
लडके की नौकरी पर खतरा मंडराने लगा
उसके यहां माहौल ठीक नहीं था
मंदी की
ताजतरीन मार
सब पर पडने लगी थी
इस बीच
लडके ने
नौकरी के लिए
उसी मददगार को फोन किया
फोन पर मददगार ने उसके काम की सराहना की
पर नौकरी देने से इंकार कर दिया
लडकी को फोन कर वह कुछ
बताने वाला ही था कि
लडकी का फोन आया
मददगार शख्स की बात बताते हुए
लडकी बोल रही थी
सर ने मुझे नई नौकरी दे दी है
ओफ वह कितने अच्छे है
मैं तुम्हारे लिए भी
उनसे बात करूं
क्या
लडके ने मना करते हुए
फोन काट दिया
आज
वह कुछ हार गया था
पुरानी उस दिन वाली बात याद आई
सेक्स के दौरान
फोन आने की घटना
कमाल है लडकी फोन
उस वक्त वह फोन कैसे
उठा सकती थी
वह कुछ उलझन में था
सामने दीवार थी
हाथों में फोन था
अचानक आए
गुस्से ने फोन और दीवार का
तालमेल करा दिया
फोन जमीन पर टुकडो टुकडो में पडा था
-
फिर नई नौकरी
लडकी को नई नौकरी मिल चुकी थी
वह खुश थी
उसे प्रेमी से ज्यादा पैसे मिलते थे
अंदर ही अंदर
उसे इस बात का गहरा सकून मिल रहा था
उधर दोनों की बातचीत अब
आफिस खबर और पैसे को
लेकर ही होती थी
शादी और कसमें भी
इसका हिस्सा हुआ करती थी
मगर कभी कभी
अब दोनों नए तल पर थे
इस बार लडकी उंचे तल पर थी
उसके पास अच्छी नौकरी और पैसा था
इस बीच
मददगार ने एक और दांव खेला
लडकी को बुलाया
बोला यार
हमारे
यहां प्राइम टाइम में लिए स्लाॅट खाली है
लडकी ईशारा समझ चुकी थी
उसके मुंह से गालियां निकल रही थी
लडकी ने गाली देते हुए सिगरेट सुलगाया
कुछ सोचने के बाद
वह राजी थी
मगर दिक्कत कुछ और थी
प्राइम टाइम का प्रोडयूसर कोई और था
सीधे कहे तो
इस लडकी को
उसे खुश करना था
हर तरह से
वह इसके लिए तैयार नहीं थी
मददगार बोलता रहा
वह सुनती रही
सिगरेट को जमीन पर फेंकते हुए बोली
कहां जाना होगा
अगली सुबह
वह
प्रोडयूसर के घर पर थी
उस काले मोटे को देखकर
वह कांप गई
मोटा सब कुछ एक बार में ही पाना
चाहता था
मोटा उसके सामने अपना नंगा जिस्म लेकर
खडा था
लडकी ने मुंह बंद किया
आंखों से आंसू आ गए
वह उसे झेलती रही
मोटा उसे नोंचता खसोटता रहा
लौटते वक्त
कार में बैठी
लडकी सोच रही थी
राक्षस साला
आगे तो देखा भी नहीं
सिर्फ
पिछे ही
खैर
जल्द ही
उस चैनल में
प्राइम टाइम का शो
चलने लगा था
लडकी स्टाॅर बन चुकी थी
इधर लडका भी नई नौकरी तलाश चुका था
उसे बेहतर पैसे मिलने लगे थे
अपनी नौकरी से खुश था
शादी करना चाहता था
रोज टीवी पर होने वाली बीबी को देखता था
अब तो उसके
घरवाले भी देखते थे
वह फोन करता
तो वह बिजी रहती
सुबह से शाम तक
बिजी
रात को भी बिजी
कुछ टूट रहा था
दोनों के बीच
शायद
नीले भंवर का रंग हल्का हो चला था
प्रेम का प्रवाह मंद पडने लगा था
दोनों
शादी के फैसले के बारे में
दोबारा सोचने लगे थे
बडे दिनों बाद
उस रात
लडक ने शराब पी
खूब पी
अब वह रोज
शराब पीता था
लडकी के बारे में सोचता था
उसके सपने का क्या होगा
उधर
लडकी के नए चैनल में
प्रोडयूसर को तीन माह बीत चुके थे
अब प्रोडयूसर भी तंग आ चुका था
रोजाना एक ही जिस्म से तंग आ चुका था
मददगार का फोन आया लडकी के पास
बोला यार तुम कुछ दिनों के लिए छुटटी ले लो
लडकी समझ नहीं पाई
पर राजी हो गई
उसे शिमला जाने के पैसे दिए गए
मददगार से साथ जाने से इंकार कर दिया
काला प्रोडयूसर जा नहीं रहा था
अब उसने प्रेमी को फोन किया
दोनों शिमला गए
साथ
मददगार के पैसे पर
शिमला का मजा
रात को जब दोनों
बिस्तर पर थे
लडकी उसे शराबी हो जाने पर भला बुरा बोल रही थी
लडके के सामने आज उसने पहली बार शराब पी थी
दोनांे साथ साथ शराब पी रहे थे
सामने टीवी आॅन था
तभी उसके चैनल पर प्राइम टाइम का स्लग दिखा
सामने एक
नई खुबसूरत लडकी दिखी
अरे
लडकी चिल्लाई
यह कैसे हो सकता है
उसने सीधे प्रोडयूसर को फोन किया
प्रोडयूसर का फोन बिजी था
मददगार को फोन किया
इधर लडका हैरान था
फाॅरप्ले के बाद सेक्स से ऐन पहले
लडकी का फोन पर बिजी हो जाना
परेशान हो जाना
उसे कुछ समझ में नहीं आया
वह चिल्लाया
उधर लडकी फोन पर चिल्ला रही थी
टीवी पर
वह नई वाली एंकर
चिल्ला रही थी
शोर हर ओर शोर
लडकी बोली
मददगार यह क्या है
मददगार ने उसे समझाने की कोशिश की
उसने साफ कहा
तुम्हारी टीआरपी डाउन हो रही थी
अब ज्यादा टीआरपी चाहिए
इसलिए नई लडकी लाई गई थी
लडकी ने फोन फेंक दिया
नंगे बदन ही खिडकी के पास पहुंच गई
कुछ घंटे बाद
वहां सन्नाटा था
रात के उस सन्नाटे में
कई गुमनाम चीजें थी
किसी के रोने की आवाज थी
एक घुटन
कई सवाल
हवा में
तैर रहे थे
शराब की बदबू
(अगर आप चाहें तो खुशबू भी मान सकते हैं) थी
लडकी उल्टी पडी थी
नींद शराब और frustration
लडके की नींद टूटी
उसने
सामने पडा जिस्म देखा
उसका
frustration
सामने आ गया
वह कुत्तों की तरह
उस पर टूट पडा
वह प्यासा था
सब कुछ
खा जाना चाहता था
एक ही बार में
समूचा
वह पागल हो गया थ
अंधा पागल
कई दिनों का frustration
सामने आ गया था
लडकी चिल्लाइ
लडकी र्का
frustration
बाहन निकला
वह गुस्से में थी
लाल
चिखती हुई बोली
तू भी मेरी मारना चाहता है
ले मार ले
घुसा दे अंदर
बुझा ले प्यास
frustration
लडके ने वैसा ही किया
मगर दूसरे ही सेकेंड ठिठका
उसने कुछ सुना था
तू भी मेरी मारना चाहता है
हां यही शब्द थे
उसकी होने वाली बीबी के
वह
रूक गया जोश ठंडा पड गया
उसने पूछा
तू भी का मतलब क्या है
अरे यार कुछ नहीं
लडकी ने कहा
वह डर गई
लाल चेहरा
फक पड गया
मैं सपना देख रही थी
मुझे लगा ..
कोई मेरे साथ
जबरदस्ती कर रहा है
..
लडका समझ चुका था
frustration
लडकी भी समझा चुकी थी
..
सुबह
सामान पैक था
दोनों ने
टूर कैंसल कर दिया
बताते हैं
कई दिनों तक
दोनों में बात नहंी हुई
फोन पर घंटों चिपके रहने वाले
एक
मिस काॅल करने और पाने को तरस गए
एसएमभी नहीं भेजा
इधर
चैनल में लडकी की टीआरपी डाउन हो चली थी
लडका काम और उस लडकी के बीच उलझ चला था
तभी
नियती का एक और पासा
खतरनाक खेल
एक ब्रेकिंग न्यूज
लडके को मिली
अरे यार
उस चैनल में
एक प्राइम टाइम एंकर थी
अभी तीन माह पहले आई थी
जिसकी चर्चा है बहुत आज कल
हां
याद है ना
शायद
तू तो उसे जानता है
ना अरे नहंी
क्या हुआ ?
उसका एमएमएस आया है नया
वह देखना नहीं चाहता था
पर दोस्त को मना नहीं किया
ब्लूटूथ से
एमएमएस लेते वक्त
लडके को
पसीने आ गए
प्राडयूसर ने
उसके साथ गुजारे निजी
वक्तों का
एमएमएस बनाया था
बेहद अश्लील
"tu भी मेरी मारना चाहता है"
उसे बहुत कुछ
समझ आ चुका था
रात
उसे नींद नहीं आई
तनाव में उसने गोलियां खा ली
20 नींद की गोलियां
लडकी भी बेहद तनाव में थी
तनाव कम
पछतावा ज्यादा
बेचारगी भी छुपी हुई
सामने
गरीब मां बाप
और
दूर जाते
प्रेमी की तस्वरी
सी चल रही थी
बेददर्ज जमाने की रूखी तस्वीर
वह प्रोडयूसर का
खून करना चाहती थी
मददगार को मौत देना चाहती थी
मगर वह
ऐसा कर नहीं पाई
शराब पीकर उसने
कुछ गोलियां खा ली
नियती देखिए
दोनों एक ही अस्पताल में लाए गए थे
दोनों ने ही नींद की गोलियां खाई थी
दोनों ने शराब भी पी थी
उस अंधेरी और सर्द रात को
सरकारी अस्पताल के डाॅक्टर
उन दोनों को बचा नहीं पाए
मौती जीत गई
जिंदगी हार गई
उन दोनों का
अंतिम संस्कार
अलग अलग हुआ
दोनों की रूह
उनके जिस्म से निकल
कर आमने सामने बैठ गई
उनमें भी
बात तक नहीं हुई
कोई संवाद नहीं हुआ
एक सन्नाटा सा छा गया
मगर
दोनों
किस वजह से मरे
इसका उत्तर आपको देना होगा
शुक्रिया
अभय
Tuesday, December 2, 2008
एक उत्तर भारतीय का दर्द
ये सन्देश मुझे मेरे एक साथी ने जो मुंबई में रहता है ने ऑरकुट पर भेजा है
anjule:
कहाँ हैं राज ठाकरे.....और उसकी बहादुर gundo ki ''महाराष्ट्र नव-निर्माण सेना' ?? उसको बताओ.....200 एन0 एस0 जी0 कमांडोज़ ( जिनमें कोई 'मराठी-मानुष' नहीं है....सब या तो उत्तर भारतीय हैं या दक्षिण भारतीय) जो भेजे गए उसकी तथाकथित 'आमची मुंबई' को आतंकवादियों से बचाने के लिए. जिन्होंने इसलिए अपनी जान दी ताकि 'वो' जिंदा रह सके......जिन्होंने इसलिए अपनी नींदों की कुर्बानियां की ताकि 'वो' चैन से सो सके. जिन्होंने अपने लहू की सुर्खी से "आमची मुंबई'' नहीं ''अपनी मुंबई'' के माथे पर अपनी शहादत से तिलक कर दिया...........मुंबई किसी के 'बाप' की नहीं....''भारत माँ'' की है. हर हिन्दुस्तानी की है.....बिल में छिपे 'भाषावादी चूहों' से कह दो की अब वो बाहर आ जाएँ, बहादुर शेरों ने.....(वो चाहे किसी भी फोर्स के हों .....किसी भी राज्य के हों) मुंबई के खूबसूरत गुलिस्तान में घुसे वहशी भेड़ियों के कायर कलेजे अपने जूतों की एडियों के तले मसल कर रख दिए हैं.....!!!
इस मुठभेड़ में शहीद हुए हर बहादुर हिन्दुस्तानी की शहादत को सलाम.......!!!!
anjule:
कहाँ हैं राज ठाकरे.....और उसकी बहादुर gundo ki ''महाराष्ट्र नव-निर्माण सेना' ?? उसको बताओ.....200 एन0 एस0 जी0 कमांडोज़ ( जिनमें कोई 'मराठी-मानुष' नहीं है....सब या तो उत्तर भारतीय हैं या दक्षिण भारतीय) जो भेजे गए उसकी तथाकथित 'आमची मुंबई' को आतंकवादियों से बचाने के लिए. जिन्होंने इसलिए अपनी जान दी ताकि 'वो' जिंदा रह सके......जिन्होंने इसलिए अपनी नींदों की कुर्बानियां की ताकि 'वो' चैन से सो सके. जिन्होंने अपने लहू की सुर्खी से "आमची मुंबई'' नहीं ''अपनी मुंबई'' के माथे पर अपनी शहादत से तिलक कर दिया...........मुंबई किसी के 'बाप' की नहीं....''भारत माँ'' की है. हर हिन्दुस्तानी की है.....बिल में छिपे 'भाषावादी चूहों' से कह दो की अब वो बाहर आ जाएँ, बहादुर शेरों ने.....(वो चाहे किसी भी फोर्स के हों .....किसी भी राज्य के हों) मुंबई के खूबसूरत गुलिस्तान में घुसे वहशी भेड़ियों के कायर कलेजे अपने जूतों की एडियों के तले मसल कर रख दिए हैं.....!!!
इस मुठभेड़ में शहीद हुए हर बहादुर हिन्दुस्तानी की शहादत को सलाम.......!!!!
Subscribe to:
Posts (Atom)